| नन्हा फूल जो चुन लाया चैतन्य |
बच्चों के मन की संवेदनशीलता और सोच को आँक पाना हम बड़ों के लिए असंभव ही है । आमतौर पर बड़े बच्चों के विषय में सोचते रहते हैं कि उनके लिए क्या लायें....? उन्हें क्या दिलवाएं...? ये बात और है कि ये नन्हें- मुन्हें जो करना चाहते हैं उसके लिए शायद हमारे जितना सोचते नहीं पर हम भी हरदम उनके मन में तो ज़रूर बसते हैं ।
चैतन्य आज एक नन्हा सा जंगली फूल ले आया । उसे लगता है कि उसकी पसंदीदा एक प्यारी सी कार्टून करेक्टर की तरह माँ भी अपने बालों में फूल लगाये । उसको यह सूझा मुझे इस बात ने चौंकाया तो ज़रूर पर ख़ुशी भी बहुत मिली । आज दो क्षणिकाएँ मेरे आँगन के नन्हे फूल की इस सूझबूझ पर :)
एक नन्हा जंगली फूल
बन गया विशेष
पाकर उसके हाथों का स्पर्श
और मेरे हृदय ने मानो
छू लिया अर्श
चुन लाया वो नन्हा सा उपहार
मन में लिए कई विचार
मानो पूछ रहा हो , माँ
तुम सजती क्यूँ नहीं ?
बस , मुझे ही संवारती हो हरदम
.jpg)