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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

22 November 2013

बाल मन की तटस्थता


चैतन्य


चैतन्य
चीज़ों से, बातों से
ऊब जाने का
तुम्हारा स्वभाव
नित नया पाने का भाव
बड़ा प्रबल है
तुम से जुड़ा कुछ भी
तुम्हारी निर्बलता नहीं बनता
ना ही उपजती है आसक्ति
तुम्हारे मन में
कुछ नहीं बांधता तुम्हें
मन से, विचार से, पूर्णतः स्वतंत्र
कितने ही आसुरी भावों से दूर
संतुष्टि भरी सोच और
भीतर का ठहराव लिए
तुम्हारे ऊर्जामयी मन में
न नकारात्मक वृत्ति है
न ही कोई भय
स्वयं को लेकर पूर्णता है
तुम्हारा अपना एक मार्ग है
जिस पर ना परम्पराएं हैं
ना विवशताएँ
तुम्हारे पास है
मन की कहने और करने
का असीम सामर्थ्य
बाल मन की ये तटस्थता
हर दिन एक नया पाठ पढ़ाती है
एक माँ के मन को
जीवन का सही अर्थ बताती है
नई  चेतना जगाती है

67 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना … कोमल भावों से भरी

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  2. मां का बच्चे के प्रति विशेष भाव प्रकट करती कविता पर ध्यानाकर्षण इसमें है कि 'हर दिन का नया पाठ एक मां के मन को रोज अगर जीवन का सही अर्थ' बता रहा है चेतना दे रहा है। अत्यंत सुंदर और यशोदा मैया का बालकृष्ण के साथ अंतर्मन से संवाद।

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  3. बहुत ही अच्छे भाव!
    प्रिय चैतन्य को जन्म दिन की अशेष शुभकामनाएँ!


    सादर

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  4. बहुत ही सुंदर और प्रेरक.

    रामराम.

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  5. आज कल इस बाल मन पर बाहरी प्रभाव बहुत जल्दी और ज्यादा पड़ता है , ये बाल मन सदा मासूम ही रहे यही कामना । अच्छी कविता ।

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  6. अत्यंत सुंदर.माँ का बच्चे के प्रति विशेष भाव लिए रचना.

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (23-11-2013) "क्या लिखते रहते हो यूँ ही" चर्चामंच : चर्चा अंक - 1438” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  8. कल 23/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  9. वात्सल्य रस से आपको यूं ही चैतन्य सराबोर करते रहे ।

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  10. आपकी यह रचना बार-बार बुलाती है और अपने साथ कुछ देर 'पढ़ने का खेल' खेलने को कहती है। गज़ब है आपकी रचना क्षमता।

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  11. सच! जिसे देखकर थोड़ा सा बचपन हम भी पा लेते हैं..

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  12. परमेश्वर का रूप कहा जाता बालक को इसी तटस्थता के चलते योग की स्थिति है यह।

    तुम्हारे पास है
    मन की कहने और करने
    का असीम सामर्थ्य
    बाल मन की ये तटस्थता
    हर दिन एक नया पाठ पढ़ाती है
    एक माँ के मन को
    जीवन का सही अर्थ बताती है
    नई चेतना जगाती है

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  13. सुन्दर भावों की सुन्दर प्रस्तुति

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  14. bahut sundar ma ke man aur bachhon ke man dono ek dusre ko samjhate hai ye sahi ki nit navinta bachhon ko bahut hi bhati hai...............

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  15. बहुत बढ़िया बाल सुलभ मन की रचना!

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  16. बच्चे के मन को माँ से बेहतर कौन पढ़ सकता है आखिर वह माँ का ही एक हिस्सा है।
    तस्वीर भी चैतन्य की मासूमियत को दर्शा रही है।

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  17. बालमन का सुंदर चित्रण।

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  18. सच है ! जीवन जीने का सही नज़रिया तो बच्चों के पास ही होता है।

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  19. चैतन्य से जागी चेतना को सलाम !
    इतने प्यारे अल्फाज़ !!!! कहाँ मिले :)

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  20. बच्चे बहुत कुछ सिखाते हैं।
    मातृत्व का यह गौरव यूँ ही बना रहे !

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  21. निष्कलंक अकलुषित स्निग्ध बालमन

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  22. कोमल एहसास लिए है आपकी रचना ... बच्चे नित पल कुछ सीखें, आत्मविश्वास बने, कुछ सीखने की प्रबल इच्छा रहे उनके अंदर ... इससे ज्यादा एक माँ बाप चाहते भी क्या हैं ... भावमय रचना ...

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  23. कोमल भाव लिए बहुत ही सुन्दर रचना....
    बेहतरीन...
    :-)

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  24. बाल मन की ये तटस्थता
    हर दिन एक नया पाठ पढ़ाती है
    एक माँ के मन को
    जीवन का सही अर्थ बताती है
    नई चेतना जगाती है
    ....बहुत कुछ सीख सकते हैं हम बच्चों से...कोमल अहसासों से आपूर बहुत भावमयी रचना...

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  25. तुम्हारा अपना एक मार्ग है
    जिस पर ना परम्पराएं हैं
    ना विवशताएँ.....
    बचपन सी बिंदास अवस्था कोई नहीं होती। बहुत खूब

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  26. पवित्र बालमन का असीम सामर्थ्य

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  27. हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है, अगर हम अपने आस-पास हर चीज़ को सजग भाव से देखें-समझें तो...
    बहुत सुंदर मोनिका जी!
    ~सादर!!!

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  28. भावमय करते शब्‍दों का संगम ....
    चैतन्‍य के लिये अनंत शुभकामनाएं

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  29. आज से कुछ सालों बाद जब चैतन्य इन पंक्तियों को पढ़ेगा ..समझेगा ...वह उसकी ज़िन्दगी का कितना खूबसूरत..समृद्ध पल होगा ...!!!

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  30. ना विवशताएँ
    तुम्हारे पास है
    मन की कहने और करने
    का असीम सामर्थ्य
    बाल मन की ये तटस्थता
    हर दिन एक नया पाठ पढ़ाती है
    एक माँ के मन को
    जीवन का सही अर्थ बताती है
    नई चेतना जगाती है

    ऊर्ध्वगामी बनाती है चेतना को बालमन की अन्वेषण वृत्ति।

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  31. बालपन ऐसा ही उन्मुक्त होना चाहिए...

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  32. बहुत सुन्दर। लगा जैसे यशोदा मईया कन्हैया से कह रही हों!
    चैतन्य को ढेर सारा आशीष।
    सादर
    मधुरेश

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  33. मन को छूती कोमल रचना

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  34. बाल मन की ये तटस्थता
    हर दिन एक नया पाठ पढ़ाती है
    एक माँ के मन को
    जीवन का सही अर्थ बताती है
    नई चेतना जगाती है-------

    मन से निकली सच्ची अनुभूति
    बहुत सुंदर अनुभूति
    सादर

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  35. जानने की इच्छा बलवती है, उसे ऊर्जा दिये रहें।

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  36. बाल मन की ये तटस्थता
    हर दिन एक नया पाठ पढ़ाती है
    एक माँ के मन को
    जीवन का सही अर्थ बताती है
    नई चेतना जगाती है
    sachchi baat jo shayad har ma anubhav karti hai
    sunder
    rachana

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  37. शुक्रिया आपकी टिप्पणियों का समाज सापेक्ष लेखन का आपके।

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  38. शुक्रिया आपकी टिप्पणियों का सुन्दर सामाजिक लेखन का।

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  39. इस चैतन्य रूपी चित्त को बस प्रेरणा देते रहिये !
    बहुत सुन्दर रचना है !

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  40. amazingly impressive .............extraordinarily wonderful blog ....plz do visit my new post : http://swapniljewels.blogspot.in/2013/12/blog-post.html

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  41. संवेदित भावलिए सुन्दर रचना..चैतन्य को ढेर सारा आशीष।

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  42. bahut hi sunder prastuti. manovaigyanik vivechan

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  43. उत्तम...इस प्रस्तुति के लिये आप को बहुत बहुत धन्यवाद...

    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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  44. उन नासमझी के दिनों में फिर घूम आने को जी चाहता है...सुंदर अभिव्यक्ति।।।

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  45. सुंदर प्रस्तुति।।।

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  46. बेहद स्तरीय लेखन कर रहीं हैं आप अभिनव सामाजिक विषयों पर। शुक्रिया आपकी प्रेरक -उत्प्रेरक टिप्पणियों का।

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  47. वाह... उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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  48. वाह !!! बहुत सुन्दर .....माँ बेटे के रिश्ते जैसी निर्मल रचना

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  49. सच ... बच्चो से कितना कुछ सीखने को मिलता है
    बहुत सुंदर रचना में आपने जो ये बात बाँधी है .... मन मोह लिया

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  50. यही तो बाल मन और बचपन है

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  51. काश हम भी सीख पाते ...

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  52. आपकी सद्य प्रेरक टिप्पणियों का शुक्रिया।

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  53. संतुष्टि भरी सोच और
    भीतर का ठहराव लिए
    तुम्हारे ऊर्जामयी मन में
    न नकारात्मक वृत्ति है
    न ही कोई भय
    स्वयं को लेकर पूर्णता है
    तुम्हारा अपना एक मार्ग है
    जिस पर ना परम्पराएं हैं
    ना विवशताएँ

    सकारात्मक अवलोकन एवं विष्लेश्णात्मक अभिव्यक्ति


    आपको नववर्ष 2014 की मंगल कामनाएं...

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  54. बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

    नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-तुमसे कोई गिला नहीं है

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  55. बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

    नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-तुमसे कोई गिला नहीं है

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  56. बहुत खूबसूरत रचना।
    नववर्ष की ढेरों मंगल कामनाएँ

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  57. आपको भी नव वर्ष 2014 के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ

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  58. एक माँ के मन को
    जीवन का सही अर्थ बताती है
    नई चेतना जगाती है sahi bat hai jivan ka arth kai bar bacche anjaane me hamen sikha jaate hain ..sundar abhiwayakti ....

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  59. बहुत सुंदर----
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    नववर्ष की हार्दिक अनंत शुभकामनाऐं----

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  60. एक माँ अपने बच्चे की सच्ची दृष्टा होती है.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  61. बहुत बढ़िया प्रस्तुति.

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  62. चैतन्य का कोना भी पढ़ा मैंने............बेहद अच्छा लगा :-)
    तभी तो बच्चे भगवानजी का रूप माने जाते हैं !!
    amazing post.

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