My photo
पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

21 January 2012

ब्लॉग्गिंग से दूरी के मायने ...!

आज महीने भर बाद अपने ब्लॉग पर आना हुआ है । अपने देश, अपने घर जाकर वापस लौटी हूँ । इस बीच ब्लॉग्गिंग से पूरी तरह दूरी बने रहने के चलते एक ओर जहाँ कुछ खालीपन का लगा वहीँ अपनों का  साथ पाकर मन नयी ऊर्जा से भर गया । हाँ, इस दौरान यह ज़रूर समझ आया की ब्लॉग्गिंग से दूरी के मायने क्या हैं ? क्या है , जो दुनिया के कोने कोने में बैठे लोगों को आपस में जोड़े रखता है ? 


अभिव्यक्ति को नये आयाम देने वाली ब्लोग्गिंग की विधा सच में हमें बहुत कुछ दे रही है ।  ब्लॉग्गिंग से दूर रहकर यह बात अच्छी तरह समझ आ जाती है। सूचनाओं और साहित्य का यह संसार हमारे मन के वैचारिक दृष्टिकोण को प्रवाहमयी बनाये रखता है । अनगिनत जानकारियां मिलती हैं । इससे न केवल हमारे ज्ञान का दायरा बढ़ता है बल्कि ब्लॉगर साथियों के विचारों को ससम्मान स्वीकार करने का भाव पनपता है । मन-मस्तिष्क में उमड़ने वाले विचारों को विस्तृत दृष्टिकोण मिलता है । 


यहाँ तकनीक को समझने- समझाने की बात भी है और अपनी भाषा को समृद्ध करने का प्रयास भी । ब्लॉग्गिंग एक ऐसा मंच है जहाँ कोई अपने गाँव से जुड़ी बातें साझा कर रहा है तो कोई अंतर्राष्ट्रीय ख़बरों का विश्लेषण । सूचनाओं का पिटारा है ब्लॉग्गिंग । जिसके भी ब्लॉग पर जाएँ कुछ जानने सीखने को ज़रूर मिलता है । 


इन दिनों जब भी अख़बार उठाया तो लगा मानो कुछ कमी है । यूँ भी अख़बार के चंद पन्नों में हर किसी को  हर रोज़ उसकी पसंद की सामग्री मिल जाये यह संभव नहीं । ब्लॉग्गिंग की सबसे बड़ी विशेषता यही है की यहाँ सभी को अपनी रूचि के अनुसार पढने लिखने को मिल जाता है । रसोईघर से लेकर राजनीतिक गलियारों तक । आपको जिस विषय में पढ़ना-जानना है कुछ न कुछ ज़रूर मिल जाता है । साथ ही संवाद  भी बना रहता है । आप अपने विचार रखकर अपना दृष्टिकोण भी आसानी से व्यक्त कर सकते हैं । एक और बात जो ब्लॉग्गिंग को विशेष बनाती  है वो यह की आज भी इसमें व्यावसायिकता और औपचरिकता ने सेंध नहीं लगाई है । मन जो कहना चाह रहा है, कहा जा रहा है । 


चाहे बात स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां देने की हो या वैज्ञानिक जागरूकता लाने की  , हर तरह ब्लोग्स आज पढ़े और लिखे जा रहे हैं । सामजिक मूल्यों और राजनीतिक उठापठक का विश्लेषण भी खूब किया जा रहा है । मुझे खुद कई बार लगता है की ब्लॉग्गिंग के ज़रिये  कई सारी जानकारियां मिल जाती हैं और काम भी आती हैं । 


समसामयिक विचारों के साथ ही कई बार ब्लोग्स पर जाने माने साहित्यकारों की रचनाएँ भी पढ़ने को मिल जाती हैं । जिन्हें ब्लॉगर साथी अपने ब्लोग्ग्स पर साझा करते रहते हैं । ब्लॉग्गिंग में हमारी हिंदी भाषा भी  समृद्ध बन रही है । यहाँ गद्य भी निखर रहा है और पद्य भी । संचार जगत की इस नयी विधा ने हम सबको अभिव्यक्ति का एक ऐसा मंच  दिया है जो लोकल भी है और ग्लोबल भी। यक़ीनन ब्लॉग्गिंग को व्यक्तिगत रूप से कोई जितना देता है उसका हिस्सा बनकर उससे कहीं अधिक पाता है ।

82 comments:

  1. मोनिका जी ....स्वागत है आपका ...कई दिनों से ब्लोगिंग में आपको मिस कर रहे थे ...आपका अपना दृष्टिकोण ....सकारात्मक भाव से लिखे गए आपके लेख और टिप्पणी दोनों ही मिस कर रहे थे .... ... ..सार्थक आलेख से पुनः शुरुआत की है आपने ...

    ReplyDelete
  2. Bahut hi achcha aalekh...sach, blogging ne ek khaas kona bana liya hai zindagi ke ghar mein...!

    ReplyDelete
  3. वापसी का स्वागत है। भारत जाकर तो ऊर्जा और उत्साह का स्तर एकदम टॉप लेवल पर आ जाता है।

    ReplyDelete
  4. हम भी काफी दिनों के बाद आज ही आये हैं ..और अपनी पोस्ट लिखते वक्त आपकी यानी अपनी एक नियमित पाठक की भी याद आयी .....स्वागत है !

    ReplyDelete
  5. अभिव्यक्ति को नये आयाम देने वाली ब्लोग्गिंग की विधा सच में हमें बहुत कुछ दे रही है ।

    स्वागत है मोनिका जी आपका... सच है अपनों का साथ हमें नयी ऊर्जा से भर देता है, इतने दिनों के बाद आपकी पोस्ट देखकर ऐसा ही लगा.... :)
    सार्थक आलेख

    ReplyDelete
  6. कुछ तो है, ब्लॉगिंग से अधिक समय तक दूर रहना संभव नहीं हो पाता है।

    ReplyDelete
  7. बिलकुल सही कहा आपने,मोनिका जी.

    ReplyDelete
  8. बहुत सटीक बात कही आपने मोनिका जी ! लेखन मन को बहलाने का एक सर्वोत्तम साधन है ! मगर कभी-कभी ब्लॉग से थोड़ी बहुत दूरी भी अच्छी है ! सब चीजे साथ-साथ चले तो उत्तम ही हैm यह भी नहीं की अपने लिखने के हुनर को पूर्ण तिलांजली दे दो और यह भी नहीं कि सब कुछ छोड़-छड ब्लॉग से ही चिपके रहो !

    ReplyDelete
  9. निश्चित रूप से बहुत कुछ प्रासंगिक है आपके इस आलेख में ....थोडा सा टंकण की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है ....जैसे ....ब्लॉगिंग , ब्लॉगस ,...सफल और सार्थक लेखन के लिए आपको हार्दिक शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  10. @यक़ीनन ब्लॉग्गिंग को व्यक्तिगत रूप से कोई जितना देता है उसका हिस्सा बनकर उससे कहीं अधिक पाता है ।

    आपसे सहमत

    ReplyDelete
  11. आप बहुत सही कह रही हैं मोनिका जी.
    अपने भारत निवास के संस्मरणों के बारे में
    भी कुछ लिखियेगा.एक दूसरे के अनुभव, भाव-विचारों को जानकर अच्छा लगता है.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    आपके दर्शन और सुवचनों से मुझ में उत्साह का
    संचार होता है.

    ReplyDelete
  12. ब्लोगिंग के विविध रंग का आनंद ही कुछ और है..

    ReplyDelete
  13. सहमत हूँ आपसे ....
    शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  14. बिलकुल सही कह रही हो आप सहमत हूँ !
    अच्छी लगी पोस्ट आभार !

    ReplyDelete
  15. Welcome back! Bahut badhiya aalekh!

    ReplyDelete
  16. बात पते की है...

    ReplyDelete
  17. स्वागत है ....... हर एक की रूचि का स्वाद यानि हर ब्लॉग मायने रखता है , ऐसा कहकर हर ब्लौगर को सम्मान दिया .

    ReplyDelete
  18. ब्लॉग्गिंग को व्यक्तिगत रूप से कोई जितना देता है उसका हिस्सा बनकर उससे कहीं अधिक पाता है ।
    बिल्‍कुल सही कहा है आपने .. सार्थक प्रस्‍तुति के साथ आपकी वापसी का स्‍वागत है ... शुभकामनाएं ।

    ReplyDelete
  19. Welcome Back :)

    ब्लोगिंग सच मे अब एक नशा सा होती जा रही है।

    सादर

    ReplyDelete
  20. स्वागत है आपका.

    ReplyDelete
  21. ब्लॉग्गिंग सही मायने में एक संपूर्ण संसार है जिसमे सभी विस्वा बन्धुत्वा की भावना के एक दुसरे को सराहते है और सम्मान करते है. ये इस भौतिकतावादी समाज को लोप होती सामाजिकता का पाठ पड़ा रही है.

    ReplyDelete
  22. ब्लोग्स पर अपनी रूचि के अनुरूप हर तरह की सामग्री मिलती है पढ़ने को ..वापसी पर ब्लॉग जगत में स्वागत है .. सटीक लेख

    ReplyDelete
  23. सार्थक आलेख

    ReplyDelete
  24. सर्वप्रथम तो ब्लॉगिंग के प्रति सकारात्मक उर्ज़ा से ओतप्रोत होकर छुट्टियों से आपकी पुनः वापसी पर स्वागत!!
    आपकी बात से पूरी तरह सहमत!!

    वास्तविक दुनिया में जब सभी समझदार इक्कठे होते है तो हर कोई बोलना चाहता है और दूसरे को बोलने नहीं देना चाहता। :) पर ब्लॉगिंग की इस विधा में ब्लॉगर खुलकर अपनी बात रख सकता है प्रतिक्रिया ले सकता है, समाधान कर सकता है बिना किसी अवरोध के!!

    मनोविचारों से तनावमुक्ति का तो यह सर्वश्रेष्ठ साधन है।

    ReplyDelete
  25. स्वागत है आपका ...हमलोग इंतजार ही कर रहे थे .
    सही है ...ब्लोगिंग के माध्यम से हमें बहुत कुछ जानने और समझने को मिल जाती है .

    ReplyDelete
  26. मोनिका जी,बहुत दिनों से दूरी रहने के बाद आज आपको देख कर हार्दिक खुशी हुई,आपके इस सार्थक आलेख के साथ आपका स्वागत है,....

    बहुत अच्छी प्रस्तुति,
    new post...वाह रे मंहगाई...

    ReplyDelete
  27. आप की वापसी का स्वागत है और आप के विचारों से पूर्ण सहमति ...
    शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  28. मोनिका जी
    आपका स्वागत है ब्लॉगिंग से ज्यादा समय तक दूर रहना संभव नहीं है।....आप से सहमत हूँ

    ReplyDelete
  29. बिलकुल सही कहा आपने,मोनिका जी.मुझे भी ऐसा ही लगता है..हम सब आप को मिस कर रहे थे..

    ReplyDelete
  30. ब्लॉग्गिंग की सबसे बड़ी विशेषता यही है की यहाँ सभी को अपनी रूचि के अनुसार पढने लिखने को मिल जाता है ।

    आपकी कमी महसूस हुई स्वागत है वापिसी में......बिलकुल सहमत हूँ आपसे.........कुछ दिन दूर रहो तो ब्लॉग की बहुत याद आती है........गूगल का बहुत आभार है हिंदी ब्लॉगस की शुरुआत करने के लिए........और एक विशेषता और है ब्लॉगस की जो शायद आपसे छुट गयी है इस पोस्ट में........इस ब्लॉगजगत में अपने जैसी सोच रखने वाले और आपको समझने वाले लोग मिल जाते है ये बहुत बड़ी उपलब्धि है |

    ReplyDelete
  31. sach apno ke bhich rahkar sab bhul jata hei insaan ..or blogig to apnepan ka aek naya sansar hei ...aapka swagat hei ..

    ReplyDelete
  32. jitna leta he usse adhik deta he...ek daam sahi....yahi he pyaar..

    ReplyDelete
  33. ब्लोगिंग आदत ही ऐसी है कि न छोड़ी जाए । फिर भी कई लोग इससे दूर हो गए हैं ।
    बेशक एक अच्छा माध्यम है संपर्क और सजगता का ।
    वापसी पर स्वागत है ।

    ReplyDelete
  34. अब ये ब्लोगर जगत ...अपने परिवार सा लगता है

    बहुत सार्थक लेख लिखा है आपने मोनिका जी


    धीरे धीरे रख मना ...यहाँ पैर पसार
    ये जग अपना हैं ...ना किसी से बैर |..अनु

    ReplyDelete
  35. मोनिका जी - ब्लॉग्गिंग से दुरी हमेश खलती है ! अब देखिये न मुझे काफी व्यस्त रहते हुए भी , ब्लॉग्गिंग के लिए समय निकालने पड़ते है ! टिपण्णी पढ़ना और टिपण्णी देना - एक गजब का अपनत्व पैदा कर देते है ! मुझे एक सूचना चाहिए शायद आप दे सकती है- सोमनाथ मंदिर जाने के लिए कौन सा जगह उपयुक्त होगा ? अहमदाबाद या राजकोट या द्वारका ! जबाब मेरे इ- मेल या मेरे पोस्ट के टिपण्णी कोस्ट में दे सकती है ! बधाई ! (दुसरे ब्लोग्गर बंधू भी जानकारी दे सकते है !)

    ReplyDelete
  36. बहोत अच्छे ।

    नया ब्लॉग

    http://hindidunia.wordpress.com/

    ReplyDelete
  37. Sahmat hun aapki bat se ... bloging se bahut kuch milta hai ... naye naye rachnakaaron aur nayi soch se roobroo karaati hai bloging ...

    ReplyDelete
  38. मोनिका जी स्वागत है आपका बहुत दिनों बाद आज आपकी कोई पोस्ट देखी बहुत अच्छा लगा ब्लोगिंग को लेकर आपने जो कुछ भी लिखा उसे सभी सहमत हैं। ब्लॉगिंग अब केवल शौक ही नहीं आदत भी बन गई है जिसके बिना दिन पूरा ही नहीं होता :-)
    खैर अब जब आप वापस आही गई है, आप तो मेरी पोस्ट पर भी आपका स्वागत है समय मिले कभी तो ज़रूर आयेगा मेरी पोस्ट पर...आलेख लिखते-लिखते अब अभिव्यक्ति या यूं कहें की कुछ-कुछ कविता का चस्का भी लगा गया है मुझको... :) तो मेरे दोनों ही ब्लॉग पहला(मेरे अनुभव)और दूजा(आपकी पसंद)दोनों पर ही आपके आगमन की प्रतीक्षा रहेगी आयेगा ज़रूर...

    ReplyDelete
  39. हाय ! ब्लॉग विरह की वेदना से वापिस आने के लिए वैलकम बैक जी । डा. साहिबा , सिर्फ़ आपने ही ब्लॉगिंग को मिस नहीं किया बल्कि जैसा कि दोस्तों ने भी ऊपर कहा कि ब्लॉगिंग ने भी आपको मिस किया । सच्ची मुच्ची जी ।

    आइए अब ड्यूटी शुरू ..वैलकम बैक

    ReplyDelete
  40. स्वागत है पुनः ब्लोगिंग हेतु | नए आयाम देने के लिए कुछ नया तो करना ही होगा|

    ReplyDelete
  41. वेलकम बैक...स्वदेश से तरोताजा होकर लौटी होंगी...निशचय ही आपके लेखन को भी नई ऊर्जा मिलेगी.

    ReplyDelete
  42. स्वागत है.....नियमित ब्लॉगर्स की कमी किसे नहीं खटकती ? आपने अपनी अनुभूतियाँ साझा की,अच्छा लगा. सच कहा आपने ब्लॉग जगत में हर तरह की पठनीय सामग्री उपलब्ध है.हर किसी को अपनी रुचि की सामग्री मिल जाती है. नई उर्जा लेकर लौटी हैं, हमें अच्छा पढ़ने को मिलेगा.

    ReplyDelete
  43. satya vachan :)

    ReplyDelete
  44. nai urja aur nai anubhuti ke saath punh apno ke beetch swagat hai.

    ReplyDelete
  45. सच कहा आपने ब्लोगिंग बिना सब सून.

    ReplyDelete
  46. बहुत ही सार्थक पोस्ट है मोनिका जी.....आप की ये बात भी मुझे बिलकुल ठीक लगी के ,

    ब्लॉग्गिंग को व्यक्तिगत रूप से कोई जितना देता है उसका हिस्सा बनकर उससे कहीं अधिक पाता है ,अच्छा लिखती है आप,विचारों को बहुत उम्दा तरीके से कागज़ पर उतरती है.....बधाई...

    ReplyDelete
  47. मोनिका जी स्वागत है ...
    आशा है आपकी अर्जित ऊर्जा यहाँ एक बार फिर प्रकाश बन कर फैलेगी . ...

    ReplyDelete
  48. blogging bcomes lyf after a few posts only...

    ReplyDelete
  49. welcome back
    we also miss u in this days
    and ya now we are waiting for some stories of your holidays

    ReplyDelete
  50. welcome ......monika ji
    sahi kaha aapne yeh blogging hi hamare jeevan me naya rang bhar rahi hai ......nahi to ek khalipan rahata tha .
    ek pahachan ..apne vicharo ki abhivyakti .......ek aisa madhyam jahan ki duniya soft ..sakartmak aur shishth hai .
    nice to read you post .
    have a nice time .

    ReplyDelete
  51. अख़बार में हम अख़बारवाले की मर्ज़ी का पढ़ते हैं पर ब्लाग की दुनिया कहीं आज़ाद है...

    ReplyDelete
  52. आपकी इस पोस्‍ट पर मैंने कल ही टिप्‍पणी लिख दी थी, ऐसा मुझे याद है। लेकिन आज टिप्‍पणी नहीं देखी और इस पोस्‍ट को सेव भी कर रखा है तो लगता है कि केवल मन में ही टिप्‍पणी लिख दी गयी और वास्‍तव में नहीं लिखी गयी। आपका स्‍वागत है। आपको हम सब मिस कर रहे थे।

    ReplyDelete
  53. बढ़िया प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    ReplyDelete
  54. aapka blogging ki dunia me swagat hai monika ji....

    ReplyDelete
  55. apki tippani dekh kar yad aaya ki bahut dino se aapki koi post ya apki kahin sakriyata dikhi nahi...aaj apki post padh kar jana ki aap to hame hi visit kar rahi thi.

    chalo acchha hua jaan liye ki blogging se doori k maayne ab jyada door mat rahiyega. :-)

    ReplyDelete
  56. सही कहा आपने। ब्‍लागिंग का अपना अलग महत्‍व है। इसके जरिए कहीं दूर बैठे बैठे भी एक दूसरे के विचारों से अवगत हुआ जा सकता है और एक दूसरे के दिल के रिश्‍ते भी बन जाते हैं।
    कुछ समय से आपके पोस्‍ट और टिप्‍पणियां नहीं दिख रही थीं तो लग रहा था कि आप कहां चली गईं..... मेरी पिछली पोस्‍ट पर आपकी टिप्‍पणी देखी तो लगा कि आप लौट आईं हैं और फिर आपकी पोस्‍ट का इंतजार होने लगा... और ये पोस्‍ट वाकई में बेहतर है......

    ReplyDelete
  57. सही है। इसीलिए तो हमने भी यह रोग पाल लिया है।

    ReplyDelete
  58. बिन ब्लोगिंग सब सून :मन की गांठें खोल ब्लोगिंग मन की गांठे खोल .कुछ नया करने को प्रेरित करती है ब्लोगिंग .कुछ नया सीखकर सांझा करने का नाम ब्लोगिंग है और यह सब प्रकाश की गति से हो जाता है .आपने सब की बात कह दी है अपने मार्फ़त वैध संतान है ब्लोगिंग हम सबकी जिसका निरंतर पल्लवन पोषण और शोषण दोहन ज़रूरी है .बधाई आपको नै ऊर्जा के साथ वापसी की .

    ReplyDelete
  59. स्वागत, मोनिका जी।
    ब्लागिंग की दुनिया मनोरंजन और ज्ञान-विज्ञान का अच्छा स्रोत है।
    अच्छा आलेख।

    ReplyDelete
  60. aisa lagata hai jaise kitana lamba antral beet gya ho ......vpasi pr hardik badhai ....

    ReplyDelete
  61. घर वापसी के लिए शुभकामनाएं और बधाई ही ठीक लग रही है.

    ReplyDelete
  62. यही तो है ब्लोगिंग का जादू।

    ReplyDelete
  63. सही कहा आपने...
    मुझे नहीं लगता इंटरनेट पर अन्यत्र कहीं भी समय बिताना इतना लाभप्रद हो सकता हैं जितना ब्लॉगिंग की दुनिया में.
    वापसी पर शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  64. सही कहा मोनिका जी. ब्लोगिंग से दूर रहने पर हमेशा लगता रहता है कि कुछ मिस कर रहे हैं, लेकिन किया क्या जाय साजिक सरोकार और अन्य जिम्मेदारियां भी जरूरी हैं.

    पुनरागमन पर स्वागत.

    ReplyDelete
  65. Welcome back Monica, hope you had a great time. True, blogging has become an inevitable part of the modern age cyberspace. Great post!

    ReplyDelete
  66. ▬● बहुत खूबसूरती से लिखा है आपने... शुभकामनायें...
    दोस्त अगर समय मिले तो मेरी पोस्ट पर भ्रमन्तु हो जाइयेगा...
    Meri Lekhani, Mere Vichar..
    http://jogendrasingh.blogspot.com/2012/01/blog-post_23.html
    .

    ReplyDelete
  67. स्वागत है. समसामयिक विषयों पर संजीदगी के साथ लिखे गए आपके आलेखों का बहुत लोगों का इंतजार रहा होगा,

    ReplyDelete
  68. मैडम नमस्कार .
    आपने रचना को पढ़ा आपका आभार
    सचमुच ही ब्लोगिंग का आनंद अलग है बहुआयामी विविध विचार यही वो मंच जहाँ अनेकता में एकता
    और एकता में अनेकता भाव दृष्टिगोचर होता है .
    पुन धन्यवाद आपका
    गणतंत्र दिवस की शुभकानाएं

    ReplyDelete
  69. ब्लॉग्गिंग की सबसे बड़ी विशेषता यही है की यहाँ सभी को अपनी रूचि के अनुसार पढने लिखने को मिल जाता है बहुत सही बात कही आपने मोनिका जी।

    ReplyDelete
  70. ब्लॉगिंग की जहाँ विशेषता आपस में जुड़े रहने की है वहीँ एक खामी भी है कि यदि आप कुछ समय इससे बाहर रहते हैं ,पढ्ते-टीपते नहीं तो संपर्क खत्म-सा हो जाता है !

    ReplyDelete
  71. bilkul sahi kaha aapne......blogging ki duniya me main navjaat hu.....aap jaise logo se bahut sikhane ko milega.....bahut aanand aa raha hai is samundra me gote laga kar

    ReplyDelete
  72. ब्लॉगिंग अपने आप में एक मुकम्मल दुनिया है,जहां सबके लिए जगह है। निश्चय ही,इसे बेहतर बनाए जाने की संभावनाएं काफी ज़्यादा हैं,मगर फिलहाल इतना भी कम नहीं कि हममें से अधिकतर लोग ऐसा बहुत कुछ न सिर्फ कह पा रहे हैं और लक्षित लोगों तक पहुंचा पा रहे हैं बल्कि खुद को तौल भी पा रहे हैं जो अन्यथा शायद ही संभव था। केवल चंद एनआरआई लेखक ही अंग्रेज़ी के माध्यम से भारत में जाने जाते थे,मगर ब्लॉगिंग ने आप समेत कितने ही प्रवासियों की भाषा और भावनाओं से हमारा परिचय करवाया।

    ReplyDelete
  73. आपकी मोहक ढंग से किया गया लेखन और कमेंट्स बहुत ही तरोताज़ा कर देते हैं |गणतंत्र दिवस की बधाई

    ReplyDelete
  74. सुंदर प्रस्तुति .
    गणतंत्र दिवस कि हार्दिक सुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  75. आपका ब्लॉग जगत में वापसी का स्वागत है..सच में ब्लॉग जगत में कुछ तो ऐसा है जो इस से एक बार जुडने के बाद अलग नहीं होने देता...आभार

    ReplyDelete
  76. मोनिका जी वापसी पर आपका स्वागत .> एक ब्लॉग सबका '
    सादर

    ReplyDelete