My photo
पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

26 April 2020

कोरोना संकट - लॉकडाउन --- पारिवारिक रिश्तों में संयम और साथ परीक्षा भी


कोरोना संक्रमण की महामारी ने महिलाओं के जीवन के कई पहलुओं पर असर डाला है |  इस  वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन ने दुनियाभर में  घरेलू हिंसा के आँकड़ों में इजाफा किया है | अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत यूरोप के कई देशों में लॉकडाउन का असर   घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी  के रूप में भी सामने आने लगा है। अमेरिका में डीसी सेफ नामक एक संस्था के अनुसार  हालिया दिनों में उनके पास आने वाले घरेलू हिंसा से जुड़े  शिकायती फोन कॉल की संख्या  दोगुनी हो गई है। इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में  भी घरेलू हिंसा के मामले 40 फीसदी बढ़ गए हैं। कोरोना संकट के इस दौर में अमेरिका में तो घरेलू हिंसा के मामले देखने वाले वकीलों ने स्थानीय प्रशासन को विशेष चेतावनी  भी जारी की है। साथ ही पीड़ितों तक आसानी से पहुंचने के लिए वहां  20 राज्यों के सीनेटरों ने सरकार से घरेलू हिंसा पीडि़तों की सहायता करने वाली एजेंसियों  को  लॉकडाउन से छूट देने की मांग भी  रखी है |  यही वजह है कि विशेषज्ञों ने  कोरोना  की महामारी के सामाजिक असर को लेकर भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अतिरिक्त तनाव या भय से घरों में अत्याचार की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों के लिए यह समय  बेहद मुश्किलों भरा साबित हो रहा है।   

गौतरलब है कि  हमारे यहाँ भी इन दिनों कोरोना वायरस के प्रकोप को बढ़ने से रोकने के लिए  पूरे देश में 21दिन का  लॉकडाउन लगाया गया है  | हाल ही में  राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी  लॉकडाउन की इन स्थितियों में महिलाओं के विरुद्ध  हिंसा बढ़ने के मामलों को लेकर ट्ववीट किया है | चिंतनीय है ना  सिर्फ  घरेलू हिंसा में लगातार  बढ़ोतरी की ख़बरें आ रही हैं बल्कि राष्ट्रीय महिला आयोग के मुताबिक घरेलू हिंसा से संबंधित विभिन्न प्रकार की शिकायतें भी  मिल रही  हैं |  ऐसी शिकायतें भी आई हैं  जिनमें  पति पत्नियों को अभद्र भाषा बोल रहे हैं और उनको कोरोना वायरस  बुला रहे हैं।  राष्ट्रीय महिला आयोग के  मुताबिक 24 मार्च के 1 अप्रेल तक, यानी की लॉकडाउन के बाद के एक  सप्ताह में उन्हें 69 शिकायतें मिलीं |  इतना ही नहीं ऐसी शिकायतें दिन-पर-दिन बढती ही जा रही हैं |  कहना गलत  नहीं होगा की अनगिनत मुश्किलें साथ लाने वाली इस महामारी की चिंता का केवल चिकित्सकीय पक्ष ही नहीं है |  सामाजिक-पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर  भी कई समस्याएं सामने आने लगी हैं |  

दरअसल  परिस्थिजन्य  दबाव मानवीय  व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है | मौजूदा हालातों में  भी कोरोना संक्रमण  को लेकर भय, भ्रम और तनाव का परिवेश बना हुआ है |  घरों  के भीतर सिमटे लोग आर्थिक मंदी से लेकर शारीरिक सेहत तक, कई बातों और हालातों की  चिंता में  डूबे हुए हैं |  दुखद है  कि हमेशा की  तरह भारत ही नहीं वैश्विक स्तर भी आधी आबादी  ही इस बदले हुए सामाजिक-पारिवारिक परिवेश का सबसे ज्यादा शिकार हो रही  हैं | सामान्य स्थितियों में भी औरतें परिवारों में बढ़ते तनाव का आसान शिकार रहती हैं |  ऐसे में इस वैश्विक आपदा में उनकी परेशानियां कई मोर्चों पर बढ़ा दी हैं |  गृहिणियां हों या कामकाजी,  ना केवल उनपर काम का  भार बढ़ गया है बल्कि रिश्तों से संयम और सहजता भी खो रही है |  व्यस्तता और भागमभाग में बीत रही जिन्दगी में अचानक आया यह ठहराव हमारे घरों के  भीतर बहुत कुछ बदल रहा है |  यही वजह है  कोरोना वायरस की मार जीवन के लगभग हर पहलू पर दिख रही है | आर्थिक ही नहीं सामाजिक-पारिवारिक मोर्चे पर भी इस संक्रमण के कारण बनीं रहने-जीने की परिस्थितियाँ  गहरा असर डाल रही हैं |  एक ओर इस खतरनाक वायरस ने दुनिया भर  में हजारों लोगों की जिन्दगी लील ली है तो दूसरी ओर यह वैवाहिक रिश्तों में भी दूरिया ला रहा है |  चीन में तो घर में कैद होकर एक-दूजे के  साथ समय बिता रहे  शादीशुदा दंपतियों के बीच कोरोना  वायरस तलाक की वजह तक बन चुका है |   गौरतलब है कि चीन के शिचुआन प्रांत में  बीते  दिनों 300 से ज्यादा दंपतियों ने तलाक की अर्जी दाखिल की  थी |  यहाँ तक कि वहां अब तलाक की अर्जियां स्वीकार करना बंद कर दिया था |   कहना गलत नहीं होगा कि सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े इन संकटकालीन हालातों में संबंधों की हकीकत भी सामने आ रही है |   

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के  कहर के कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों में सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने के दिशानिर्देश जारी किये गए हैं  |  इस वायरस के फैलाव को रोकने का यही सबसे प्रभावी तरीका भी है | हमारे यहाँ भी इस संक्रमण के  बढ़ते मामलों को देखते हुए आमजन से सावधानियां बरतने की अपील की गई है । केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने की बात कही है |  गौरतलब है  कि  सोशल डिस्टेंस का अर्थ लोगों से दूरी बनाए रखना है। इसके लिए कई  कम्पनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से ही काम करने को कहा है | कम से कम घर से बाहर निकलने और  सामाजिक मेलजोल कम  रखने का उद्देश्य इस वायरस एक फैलाव को रोकने का है |  ऐसे में घर के भीतर अपनों के साथ समय बिताना  ही एक रास्ता रह गया है | हर उम्र, हर तबके के लोगों के लिए घर से बाहर समय बिताने का  विकल्प बंद हो गया है | ध्यान देने वाली बात है कि पहले  घर में होने वाली हिंसक प्रताड़ना से बचने के लिए औरतें मायके भी चली जाया करतीं थीं | इतना ही नहीं सामान्य दिनों में कामकाजी महिलाओं का लंबा समय दफ्तर, सामाजिक मेलजोल और सार्वजनिक स्थलों पर भी गुजरता था | साथ ही गृहिणियों को  घर के सदस्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने के बाद कुछ समय खुद के लिए भी मिल जाता था | घर के काम के लिए घरेलू सहायिकाओं की मदद ने जिन्दगी को सहज बना रखा था | इन दिनों दोनों के लिए ही परेशानियां बढ़ गई हैं |  नौकरीपेशा महिलाओं  की मुश्किलें और ज्यादा हैं |  वर्क फ्रॉम होम करते हुए उन्हें घर के कामकाज भी देखने पड़ रहे हैं |  निश्चित रूप से लॉकडाउन के इस दौर में महिलाओं  को आम जीवन की कई बातों से जुड़ी सहजता,  स्वतंत्रता और सहायता नहीं मिल पा रही है | ऐसे में आपसी संबधों में तकरार और उलझनों के नये समीकरण बन रहे हैं  |  विचारणीय है कि लॉकडाउन में वैवाहिक सम्बन्धों में बढती यह आक्रामकता   वैश्विक स्तर पर देखने को मिल रहा है | 

देखा जाय तो  लॉकडाउन के चलते मिला यह वक्त संकट के समय साथ और संवाद का पुल भी बना सकता है | लेकिन बीते  सालों में  जिस जीवनशैली लोग हम आदी हो गए हैं , उसमें साथ रहने को  मिला समय भी समस्या बन रहा है  | चीन से सामने  आई तलाक चाहने वालों कि संख्या और दुनियाभर में बढ़ रहे घरेलू हिंसा के आंकड़े तो यही बताते हैं |  साथ ही यह भी स्पष्ट करते हैं कि  लॉकडाउन का एक लैंगिक पहलू भी है | अधिकतर घरों में घर के कामकाज स्त्रियों के ही हिस्से हैं | अफसोसनाक ही है कि घर के कामकाज हों या अपनों कि  संभाल  देखभाल के दायित्व निर्वहन की सूची में खुद को दोयम दर्जे पर रखने वाली महिलाओं को अपमानजनक व्यवहार भी झेलन पड़ रहा है |  घरेलू हिंसा और मौखिक अभद्रता के मामले तो वाकई चिंतनीय हैं | यही वजह है कि आल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेन्स एसोसिएशन समेत आठ महिला अधिकार संगठनों  ने कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लगाये गए देशव्यापी  लॉकडाउन के चलते महिलाओं के सामने  आ रहीं मुश्किलों पर गहरी चिंता जताई है |  

 दरअसल, बीते कुछ बरसों में साथ और संवाद का भाव इतना रीत गया है कि तकलीफदेह समय में भी अपनों के साथ सहजता से रहने की आदत ही छूट गई है | कोई हैरानी नहीं कि विपत्ति के समय में भी हर पल साथ  रहना,  रिश्तों में पल रही दूरियां सामने  ले आया है | हालिया सालों में दुनियाभर में पारिवारिक-सामाजिक मोर्चे पर अपनों को धैर्य से सुनने और समझने का व्यवहार गुम हुआ है |   स्मार्ट गैजेट्स की व्यस्तता  में साथ होकर भी अकेले रहने की आदत बन चुकी है | गौरतलब है कि कोरोना से चीन के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल इटली में इन दिनों इंटरनेट उपयोग में 70 फीसदी  का इजाफा हुआ है। टेलीकॉम कंपनी इटालिया एसपीए  के अनुसार इस दौरान देश में इंटरनेट कनेक्शन की  मांग में भी बढ़ोतरी हुई है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते आइसोलेशन  के कारण इटली  के लोग भी अपने  घरों में कैद हैं।  ऐसे में अधिकतर लोग वेबसीरीज और ऑनलाइन गेम्स के जरिये  अपना समय बिता रहे हैं। यानी इन तकलीफदेह   हालातों में भी अपनों के साथ कम  और इन्टरनेट पर ज्यादा समय बीत रहा है |  दरअसल, ऐसी स्थितियां चौंकाने वाली जरूर हैं पर आज के रिश्तों का कटु सच भी लिए हैं  |  साथ ही पारिवारिक रिश्तों के मोर्चे पर आये ऐसे बदलाव कमोबेश हर देश और समाज के मामले लागू होते हैं |   हालिया बरसों में साथ रहते हुए भी सम्बन्धों में खालीपन बढ़ा है |  जीवनभर के साथ वाले  शादी के रिश्ते में एक दूजे को समझने और साथ देने का भाव कम हुआ है |  ऐसे में परिस्थितिवश  जब समय साथ बिताया जाता है, तब भी भावनात्मक जुड़ाव के बजाय शिकायतें और व्यवहार की आक्रामता ज्यादा सामने आती है | कहना गलत नहीं होगा कि लॉकडाउन का दौर  पारिवारिक रिश्तों में  संयम और साथ की परीक्षा भी है |  

2 comments:

  1. चिंतनीय व विचारणीय सामयिक प्रस्तुति
    परीक्षा के दिन हैं ये

    ReplyDelete
  2. उपयोगी आलेख।
    परीक्षा की इस घड़ी में धैर्य से काम लीजिए।

    ReplyDelete