My photo
पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

01 September 2010

कान्हा फिर से आओ ना.......!


कान्हा फिर से आओ ना.......

फिर मुरली की लहर उठे
फिर तन-मन की सुध छूटे
हे माधव बंसी की धुन में
फिर आनंद बरसाओ ना........
कान्हा फिर से आओ ना.......

वृन्दावन में, हर आँगन में
तुम घर-घर में आन बसो
हे ! विराट ब्रजनंदन कृष्णा
मत तरसाओ ना.........
कान्हा फिर से आओ ना..........


द्रौपदी सखा यशोदा के लाला
तेरा तो हर रूप निराला
चहुँ ओर दुशासन फैले
सखियों की लाज बचाओ ना........
कान्हा फिर से आओ ना......


बन जाओ सारथी जगत के
फिर गीता का मर्म बताओ
मन की ममता रीत चुकी
नई चेतना जगाओ ना..........
कान्हा फिर से आओ ना..........

त्राहि-त्राहि मची जगत में
राग,द्वेष, हिंसा हर मन में
सारा जग फिर मौन धरे
ऐसी धुन सुनाओ ना........
कान्हा फिर से आओ ना......
लौट के फिर तुम जाओ ना.......

कान्हा फिर से आओ ना........

32 comments:

  1. आपको एवं आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  2. बन जाओ सारथि जगत के
    फिर गीता का मर्म बताओ
    मन की ममता रीत चुकी
    नयी चेतना जगाओ ना .....

    श्री कृशनजन्माष्टमी के पवन अवसर पर
    ऐसी मनोहारी रचना पढ़ कर मन आनंदित हो उठा
    हर शब्द ऐतिहासिक सत्य को रूपांतरित करता हुआ
    स्वयं को पढवा रहा है ...
    अभिवादन स्वीकारें

    ReplyDelete
  3. काश कान्हा हमारी पुकार सुन ले!!
    कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  5. बड़ी ही सुन्दर, आग्रहयुक्त करुण पुकार।

    ReplyDelete
  6. हम सब को कान्हा के लौटने का इंतज़ार है...क्या वो सुनेंगे हमारी गुहार?
    नीरज

    ReplyDelete
  7. अब आपके बीच आ चूका है ब्लॉग जगत का नया अवतार www.apnivani.com
    आप अपना एकाउंट बना कर अपने ब्लॉग, फोटो, विडियो, ऑडियो, टिप्पड़ी लोगो के बीच शेयर कर सकते हैं !
    इसके साथ ही www.apnivani.com पहली हिंदी कम्युनिटी वेबसाइट है| जन्हा आपको प्रोफाइल बनाने की सारी सुविधाएँ मिलेंगी!

    धनयवाद ...

    आप की अपनी www.apnivani.com टीम

    ReplyDelete
  8. आपको और आपके परिवार को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

    ReplyDelete
  9. आह...मन आनंदित हो गया....
    इस सात्विक सुन्दर रचना के लिए कोटि कोटि आभार आपका !!!!

    ReplyDelete
  10. बहुत सुन्दर ..आनंद आ गया !!

    ReplyDelete
  11. रचना अति सुन्दर है ....
    आपको श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  12. अरे !
    राधा राधा कहते हो
    धारा के संग बहते हो
    धारा को मोडो तो !
    राधा संग जोड़ो तो !
    श्याम तो मिले मिलाये हैं
    गए ही कहाँ थे जो उन्हें आना है

    ReplyDelete
  13. आदरणीया डॉ. मोनिका शर्मा जी
    हार्दिक शुभकामनाएं ! मंगलकामनाएं !

    बहुत सुंदर गीत के लिए बहुत बहुत बधाई !

    वर्तमान के परिदृश्यों के संदर्भों को समेटते हुए कृष्ण भक्ति के रंग रस में रची रमी आपकी लेखनी से निसृत यह रचना हृदय के गहन तल में पैठ गई है ।

    जितनी प्रशंसा करूं , कम है ।
    गीत का हर चरण स्तुत्य है …
    उल्लेखनीय है …

    बन जाओ सारथी जगत के
    फिर गीता का मर्म बताओ
    मन की ममता रीत चुकी
    नई चेतना जगाओ ना..........
    कान्हा फिर से आओ ना..........


    आभार !
    बधाई !!
    शुभकामनाएं !!!

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  14. 'कान्हा फिर से आओ ना......
    लौट के फिर तुम जाओ ना.......'

    -यह कान्हा हम,आप के बीच से ही आयेगा |

    ReplyDelete
  15. jo siddat se bulaye, kanha uske ghar jarur aate hain.........good one...........happy janmashtmi

    ReplyDelete
  16. जय श्री कृष्ण!
    ज़रूर आयेंगे....
    आशीष
    --
    बैचलर पोहा!

    ReplyDelete
  17. @ हेम पाण्डेय जी हाँ यह सच है की कान्हा हम आपके बीच से आयेंगें.....
    बस वे आ जाएँ। अप सबकी खूबसूरत टिप्पणियों के लिए शुक्रिया ।

    ReplyDelete
  18. सारा जग फिर मौन धरे
    ऐसी धुन सुनाओ ना
    कान्हा फिर से आओ ना...

    सुंदर कविता.

    ReplyDelete
  19. जरुर सुनी जायेगी आपकी प्रार्थना.

    ReplyDelete
  20. कान्हा आ भी जाओ..
    मेरा मन भी कई बार यही कहता है !

    बहुत ही सुन्दर कविता.

    ReplyDelete
  21. अच्छा आह्वान किया आपने मोनिका जी..

    ReplyDelete
  22. सुंदर कविता!

    आपका इन्ट्रोडक्शन भी सहज और सुंदर है.. पार्ट टाईम ही सही.. कविता अच्छी है..

    ReplyDelete
  23. ... bahut sundar ... behatreen !!!

    ReplyDelete
  24. बहुत सुन्दर कविता है जो सच्चे दिल से पुकारते हैं उनकी कन्हाँ जरूर सुनते हैं। शुभकामनायें

    ReplyDelete
  25. भगवान श्री गणेश आपको एवं आपके परिवार को सुख-स्मृद्धि प्रदान करें! गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें!

    ReplyDelete
  26. इतनी सुंदर और सच्ची रचना पढने से इतने दिन वंचित रहा खेद है पढवाने के लिए आभार

    ReplyDelete
  27. बहुत सुन्दर कविता.........आशा है कृष्ण जी आपकी जरूर सुनेंगे..........

    संदीप 'साहिल'

    ReplyDelete
  28. आपकी हार्दिक आभारी हूँ अर्चनाजी....
    जो अपने इस भजन को इतनी खूबसूरती से गाया और जीवंत बना दिया

    ReplyDelete
  29. चहूँ ओर दुशासन फैले सखियों
    की लाज़ बचाओ ना।बहुत अच्छा।

    ReplyDelete