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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

12 August 2019

सुषमा स्वराज ----- देश की आम स्त्रियों के लिए प्रेरणादायी व्यक्तित्व

जिस देश की आधी आबादी आज भी सुरक्षा, सम्मान और समानता के मोर्चे पर  लड़ाई लड़ रही हो, वहां की आम  स्त्रियों के लिए  सुषमा स्वराज जैसी नेता का व्यक्तित्व पीढ़ियों तक उम्मीद और हौसले की बुनियाद रहेगा | सुषमा स्वराज ने इस देश की महिलाओं को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से यह समझाया है  कि आम सा जीवन जीते हुए भी ख़ास बना जा सकता है |  बदलाव लाने की ठानी जा सकती है | सहज और संयत रहते हुए भी प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी जा सकती है |  अपनी संस्कृति से जुड़ाव रखते हुए  देश ही नहीं  विदेश में भी अपनी और अपने  मुल्क की ख़ास प्रतिष्ठा हासिल की जा सकती है | इतना ही नहीं उन्हें  भारतीय संस्कृति की राजदूत भी  कहा जा सकता है | वे तीज  पर्व  मनाते हुए भी दिखीं तो  महिलाओं की अस्मिता के लिए आवाज़ बुलंद करते हुए भी |   यही वजह है कि  उनका गरिमामयी  और विचारशील व्यक्तित्व देश की आम स्त्रियों को सदैव बेहद अपना सा लगा |

भारतीय राजनीति की यह कद्दावर और विदुषी नेता शुरुआत से ही एक सामर्थ्यवान सोच वाली स्त्री भी रहीं |  संघर्ष और सकारात्मक समझ के साथ  देश के राजनीतिक पटल पर अपना अहम् स्थान बनाया |  इतना ही नहीं वे अपने घर-परिवार के दायित्वों और राजनेता की भूमिका, दोनों का निर्वहन करने में पूरी तरह सफल रहीं  | अपने परिवार के प्रति समर्पित सुषमा ने राजनीतिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद  निजी जिंदगी में भी अपनी जिम्मेदारियों  को पूरे मनोयोग से निभाया | भारत जैसे सामाजिक-पारिवारिक ढांचे वाले देश में उनके जीवन का यह पहलू यकीनन प्रेरणादायी है |  क्योंकि यहाँ अधिकतर स्त्रियाँ कई मोर्चों पर जूझते हुए, अनगिनत दायित्व निभाते हुए आगे बढती हैं | सुषमा  जितनी  कुशल सांसद, प्रशासक, केंद्रीय मंत्री और ओजस्वी वक्ता रहीं  उतनी  सहज और मानवीय भावों से भरी इन्सान भी |  यही वजह है कि वे एक राजनीतिक व्यक्तित्व ही नहीं जन-जन के हृदय में बसने वाली जन-प्रतिनिधि भी साबित हुईं |  हमारे यहाँ राजनीतिक पार्टियों में महिलाओं को एक सहयोगी कार्यकर्ता के तौर पर  ही देखा जाता रहा है । इतना ही नहीं उनकी निर्णयात्मक  भूमिका पर भी हमेशा ही सवाल उठाये जाते रहे हैं । ऐसे में सुषमा भारतीय संसद की ऐसी अकेली महिला नेता रहीं, जिन्हें असाधारण सांसद भी चुना गया | पड़ोसी देश को लेकर तीखे तेवर अपनाने की बात हो आया और आमजन की मदद के लिए संवेदनशीलता भरा व्यवहार,  उनका प्रेरणादायी और प्रभावी व्यक्तित्व  सदा के लिए देश और विदेशों में बसे भारतीयों  के मन दर्ज हो गया |  पराई धरती पर जा बसे भारतीय नागरिकों के मन में तो उन्होंने एक भरोसा पैदा किया कि संकट के समय उन्हें अपने आँगन से मदद मिल सकती है । भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सजग व्यक्तित्व  और विचारशील राजनीतिज्ञ की भूमिका अदा की |  इन्हीं मानवीय भावों के बल पर भारतीय राजनीति  में आधी आबादी का प्रभावी प्रतिनिधित्व करने वाली सुषमा ने वैश्विक स्तर पर देश की साख को नई पहचान दी  । कूटनीतिक मोर्चे पर सधकर बोलने वाली सुषमा स्वराज  मदद और  इंसानी सरोकारों के मामले में सदैव सहजता से संवाद करती  नज़र आईं |

उनका मन सदैव ममत्व और संवेदनाओं से लबरेज़ रहा | यही वजह है कि  भारत और पाकिस्तान  के तनावपूर्ण सम्बन्धों के बावजूद 2016 में सुषमा चंडीगढ़ में  ग्लोबल यूथ पीस फेस्टिवल में हिस्सा लेने आईं  पाकिस्तानी लड़कियों  के लिए भी आम स्त्री की तरह ही  चिंतित दिखीं थीं | तब वापसी की तय तारीख में संशय होने सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान से आये इस  दल की सुरक्षित वापसी का भरोसा दिलाया था । उनके सुरक्षित और सम्मानपूर्वक अपने घर लौटने का वादा करते हुए भारत विदेश मंत्री ने  ट्वीट किया था कि   "क्योंकि बेटियां सबकी साझी होती हैं, किसी सीमा में बंधी नहीं होतीं ।" उनके इन भावों ने पूरी दुनिया का मन जीत लिया था | । कूटनीटिक बयानों से  परे उनका यूँ यह साधारण बात सोचना और कहना उनके असाधारण व्यक्तित्व को परिलक्षित कर गया था, उस उम्मीद का आधार बना था कि वे इंसानी रिश्तों को सबसे ऊपर रखती हैं  ।यही वजह है कि हमेशा प्रभावी और तार्किक  तरीके से अपने राजनीतिक विचार रखने वाली सुषमा स्वराज विदेश मंत्री के तौर पर जज्बाती बातों को भी गहनता से समझने के लिए जानी जायेंगीं |

भारतीय राजनीति में  महिलाओं  के प्रतिनिधित्व के जो हालात हैं, उनमें ऐसे चहरे कम ही  हैं जिन्हें  जन-जन में मन में स्थान  मिला हो ।  सुषमा स्वराज ऐसे ही चेहरों में से एक रहीं | वे  अपने गरिमामयी  व्यवहार  और कर्मशील व्यक्तित्व बल पर भारतीय राजनीति की लोकप्रियता के शिखर को छूने में कामयाब हो सकीं |  उनकी सहजता और विचारशीलता अपने आप  में एक मिसाल है । वे भारतीयता का सलोना चेहरा बनीं |  उनकी जनप्रियता  राजनीति  में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े कई मिथक  तोड़ने वाली है । राजनीतिक दावपेचों और कूटनीतिक चालों के बावजूद भी उनके इस संवेदनशील व्यवहार और विचार को  आमजन  ही नहीं विरोधियों से भी समर्थन और सराहना मिली |  बतौर विदेश मंत्री उन्होंनें  वैश्विक स्तर पर भारत के लिए सकारात्मक और संवेदनशील राष्ट्र की  छवि पेश की  | सुषमा स्वराज जिस तरह अपना राजनीतिक और वैचारिक पक्ष सशक्त ढंग से सामने रखती  थीं, ठीक उसी तरह एक संवेदनशील हृदय वाली महिला  के तौर पर  भी लोगों से जुड़ी  रहीं | उनका यह सफर देश की आम स्त्रियों के लिए प्रेरणादायी है | 


4 comments:

  1. भारतीय राजनीति को अलग दिशा और अपने मंत्रालय को हर भारतीय से जोड़ने और जन जन तक पहुंचाने का श्रेय सिर्फ शुषमा जी को जाता है ... कोई कोटि नमन है मेरा

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  2. आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की २५०० वीं बुलेटिन ... तो पढ़ना न भूलें ...

    ढाई हज़ारवीं ब्लॉग-बुलेटिन बनाम तीन सौ पैंसठ " , में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन अंग दान दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विराट व्यक्तित्व नेता जी की रहस्यगाथा : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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