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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर | हिन्दी समाचार पत्रों में प्रकाशित सामाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य।प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | सम्प्रति ---समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित पुस्तकें-----कविता संग्रह- 'देहरी के अक्षांश पर' और 'दरवाज़ा खोलो बाबा', आलेख संग्रह-'खुले किवाड़ी बालमन की', लघुकथा संग्रह-'ड्योढ़ी से व्योम तक'

ब्लॉगर साथी

26 January 2026

शब्दों की यात्रा

सम-सामयिक विषयों  पर नियमित लेखन के साथ-साथ अब तक मन-जीवन से जुड़ी सामग्री समेटे चार पुस्तकें आई हैं |  जिम्मेदारियों को जीते हुए स्वयं को शब्दों से जोड़े रखने के मनोभाव ही रहे कि इनके शीर्षक  स्वयं मेरे ही मन ने सुझाये |  देहरी, दरवाज़ा, किवाड़ी और ड्योढ़ी |  



गृहिणियों की भावभूमि लिए काव्य संग्रह 


पिता और पुरुषमन से जुड़ी कविताओं का संग्रह 




खुले किवाड़ी बालमन की-  परवरिश के पहलुओं को समेटे आलेख  संग्रह   




लघुकथा संग्रह

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