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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

21 June 2015

मैं हूँ ना मेरे बच्चो

 चैतन्य  को सँभालते पापा



पिता 
बुहारते हैं  पथ 
कि कोई काँटा ना  चुभे 
 बच्चों  के पाँव में  |

पिता 
जोड़ते हैं 
  टुकड़ा टुकड़ा आसमान 
बनाते हैं छत 
कि तपिश की कोई किरण 
न दे दस्तक,  देहरी  के भीतर 
जहाँ  बच्चे   खेलते हैं खिलौनों से |

पिता  
समेटते हैं  स्वयं को 
कि विस्तार पा सके बच्चों  का व्यक्तित्व
   और करते हैं  अनुसंधान  
कि  सुरक्षित रहे   उनका  अस्तित्व | 

पिता
जीते हैं एक उलझन भरी 
अनवरत भागमभाग 
कि सुलझे हों धागे  बच्चों के  जीवन के    
ढोते हैं पीड़ा का पहाड़ 
और जुटाते हैं सुकून  और आश्वासन 
कि मैं हूँ ना मेरे बच्चो । 

31 comments:

  1. पितृत्व भाव को नमन!
    अच्छी रचना!

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  2. पितृत्व भाव को नमन!

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  3. सधन्यवाद...बेहतरीन प्रस्तुति

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  4. Ki suljhen ho dhage bachchhon k jivan me.......pita ek sambal

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  5. नमन है इन भावों को ... पिता का महत्त्व जीवन में हमेशा रहता है ... संबल होते हैं वो परिवार के ... मजबूत स्तम्भ ...

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  6. ब्लॉग बुलेटिन के पितृ दिवस विशेषांक, क्यों न रोज़ हो पितृ दिवस - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. बहुत सुंदर भाव... पिता के प्रति अहसासों को बहुत सुन्दर शब्दों में ढाला है...बच्चे के व्यक्तित्व के विकास में माँ के साथ पिता की भी भूमिका अहम होती है...

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (22-06-2015) को "पितृ-दिवस पर पिता को नमन" {चर्चा - 2014} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस की के साथ-साथ पितृदिवस की भी हार्दिक शुभकामनाएँ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  9. बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति !

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  10. बहुत सुन्दर भाव पूर्ण सृजन

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  11. और उसे प्रभावशाली रूप में व्यक्त करने के के लिए हैं "आप" - सादर

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  12. और उसे प्रभावशाली रूप में व्यक्त करने के के लिए हैं "आप" - सादर

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  13. एकदम सटीक लिखा

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  14. आपकी रचना बहुत ही अच्‍छी है। इसने गहरा प्रभाव डाला है।

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  15. nahi chukta pita apni farz se, fir kyon bacche apna krtvya bhul jate hain ..
    main hun na mere bacchon ! sundar

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  16. बहुत सुन्दर।
    ' कि सुलझे हों धागे बच्चों जीवन के ' में एक ' के' मिसिंग लग रहा है ,अगर लिखें
    ' कि सुलझे हों धागे बच्चों के जीवन के ' .… शायद ये ज्यादा बढ़िया लगे.… मोनिका जी।

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  17. बहुत प्यारे दिल को छूते भाव हैं .... सस्नेह

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  18. यह भावपूर्ण रचना प्रेरणा भी दे रही है।

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  19. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना !

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  20. बेहद प्रभावशाली प्रस्तुती दिल को गहरे कहीं छू भी गई चुभ भी गई
    आभार

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  21. बढ़िया है। माता-पिता दोनों ही बच्चों के लिए अहम हैं।

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  22. सच में आपने पिता के दायित्व और बच्चों के प्रति प्रेम का कितना सुन्दर और थोड़े में ही वर्णन कर दिया!

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  23. पिता का पक्ष बहुत सबलता से रखा है. सुन्दर.

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  24. Beautiful....bahut bahut achhi lagee ye kavita :)

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  25. पितृत्व भाव को नमन!

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  26. धूप तले आसमान में जीने का तरीका सिखाते हैं..पिता...

    बहुत सुंदर ।

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