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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

31 July 2013

पीड़ा जब हिस्से आती है




पीड़ा जब हिस्से आती है
एकाकी यात्रा नहीं करती
बहुत कुछ अनचाहा, अनपेक्षित
संग आता है उसके
जो लाता है, कभी
सब कुछ खंडित कर देने
वाला जटिल चक्रवात
तो कभी अपनी ही शक्ति के
संचय की  सुध और क्षमता
पीड़ा  कभी समझ के नए पाठ
पढ़ा जाती है, तो
कभी ऐसे नियम बना जाती है
जो सदा के लिए स्थापित हो जाते हैं
तब कल्पना, परिकल्पना और सिद्धांत
सब निरर्थक हो जाते हैं
और मन जीवन हेतु नए मार्ग
खोजने में लीन हो जाता  है
जो गंतव्य तक जाने और
स्वयं को पाने का आधार  बनते हैं

60 comments:

  1. पीड़ा सबके घर आती है, या मैं हूँ या योगेश्वर।
    सबको अपना भाग मिलेगा, जी लो उसको जीभर।

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (01-08-2013) को "ब्लॉग प्रसारण- 72" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  3. बिना पीड़ा के जीवन में सुख भी नहीं ...यही तो संघर्ष करने का हौसला देती है ....

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  4. बढ़िया, पीढा जब हिस्से आती है तो एक सुख की राह भी दिखा जाती है !

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  5. पीड़ा आती है तो अपने बवंडरों के साथ हौसला भी लिए आती है!

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  6. एक विचारणीय अनुभूति
    और सटीक पोस्ट.....
    हार्दिक शुभकामनायें ....

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  7. सच कहा.....दर्द पढाता है पाठ नए.....

    बहुत गहरे और सार्थक विचार...
    अनु

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  8. सच्चे पाठ पढने का आधार मुश्किलें और पीडाएं ही है। आपकी कविता हौसला देती है और पीडा सहन करने की क्षमता भी।

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  9. पीड़ा जब आती है तो अपने संग जीने का हौसला भी दे जाती है.. गहन अनुभूति..

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  10. very nice....these lines related to life and the way of life.....

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  11. शास्वत सत्य यही है, प्रभावशाली रचना.

    रामराम.

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  12. पीड़ा या दुख जो भी कहें। कहते हैं हर "दुख आने वाले सुख कि चिट्ठी होती है"
    सुख और दुख दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

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  13. sacchai ka bkhoobi warnan ....pida kabhi akeli nahi aati ...

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  14. पीड़ा आने के साथ सहस और शक्ति बी लाती है उसे सहने की ... उससे उबरने की ...

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  15. पीड़ा ही तो भविष्य की ओर उन्मुख करती है।

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  16. भावो को संजोये रचना......

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  17. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन होरी को हीरो बनाने वाले रचनाकार को ब्लॉग बुलेटिन का नमन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  18. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन होरी को हीरो बनाने वाले रचनाकार को ब्लॉग बुलेटिन का नमन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  19. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01/08/2013 को चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

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  20. जीवन इसी का नाम है!

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  21. पीड़ा ही सुख के मायने सिखाती है… सार्थक भाव

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  22. पीड़ा ही हमें जीना सिखाती है,

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  23. दुःख ही संघर्ष करने हौसला और सुख का मार्ग दिखाता है,,

    RECENT POST: तेरी याद आ गई ...

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  24. कितना कुछ सिखा जाती है पीडा ।

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  25. कर्मों का खाता बन आती है पीड़ा शुक्रिया करो उसको खुश हो जाओ अब हिसाब चुक्तु हो रहा है। पीछे की गलती आगे न हो। बढ़िया विचलित करती रचना। जो होता है अच्छा होता है। बुरा कुछ होता ही नहीं है।

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  26. आप कवि‍ता भी बहुत अच्‍छी लि‍खती हैं

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  27. इसी का नाम ही तो जीवन है -बस जीते जाना है ! मन को छूती कविता

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  28. हाँ बहुत कुछ सिखा जाती है पीड़ा। अपने पराये सब बे -पर्दा हो जाते हैं। गलतियों का खामियाजा भी याद दिला जाती है पीड़ा।

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  29. बहुत सुन्दर रचना...सीधे दिल को छू लेती है..

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  30. जीवन में पीड़ा है तभी तो सुख के दो बूँद इतने मीठे लगते हैं

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  31. सच! पीड़ा पढ़े सो पंडित होय..

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  32. सही कहा ............आदर्श, सिद्धांत सब धरे रह जाते हैन…शानदार

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  33. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर

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  34. बहुत सुंदर रचना

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  35. पीड़ा पर सुंदर और सार्थक रचना...............

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  36. पीड़ा में आनंद जिसे हो आये मेरी मधुशाला। …. पीड़ा जीवन का कम्पास है पथ प्रदर्शक पड़ाव है।

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  37. पीड़ा है तभी सुख का अहसास है !
    सार्थक रचना !

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  38. बहुत ही बढ़ियाँ और सार्थक रचना...
    :-)

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  39. ऊपर वाला दर्द उसी को देता है जिसमें सहने की शक्ति होती है ..बढ़िया प्रेरक रचना

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  40. आपके ब्लॉग को "ब्लॉग - चिठ्ठा" में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

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  41. आपके ब्लॉग को ब्लॉग एग्रीगेटर "ब्लॉग - चिठ्ठा" में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

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  42. पीड़ा जीवन का ही एक अंग है शायद..पीड़ा पर लिखी रचना बहुत ही लाजवाब !

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  43. पीड़ा सचमुच नियमों को छिन्नभिन्न कर जाती है

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  44. अत्युत्तम ... पीड़ा कलात्मक अभिरुचि भी निखारती है और नए मार्ग भी बनाती है

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  45. शुक्रिया आपकी निरंतर टिप्पणियों का।

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  46. hard times do give us lessons..
    and they are worth clinging on to :)

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  47. पीड़ा ताप दे-दे कर पकाती है ,डुबोती और निखारती भी है!

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  48. सत्यता को बखूबी दर्शाया है आपने |

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  49. पीड़ा ही हमें आत्म विश्वास और आगे बढ़ने को हौंसला प्रदान करती है , आपको बधाई !

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  50. sach hai....kabhi kabhi to peedha hi zinda rakhti hai.
    mujhe Maha Devi VErma ki yaad likhi lines yaad aa rahi hain:
    " tumko dhundha hai peeda me, tum me dhundhoongi peeda"

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