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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

19 March 2013

बरसों का साथ

बरसों का साथ बहुत कुछ देकर
सदा के लिए
छीन लेता है आपसी संवाद
स्थायी संबंधों की
सामाजिक रुपरेखा जीवित रहती है
पर शब्द खो जाते है
शेष रह जाती है
औपचारिकता
संबंधों को निभाने की
मन की नहीं
जगत की सुनने-सुनाने की
निश्चित हो जाती हैं परिसीमायें
पसर जाते हैं अनचाहे सन्नाटे
जो भेद जाते हैं कहीं भीतर तक
सिमट जाते हैं
ह्रदय के यथार्थ भाव
जन्म-जन्मान्तर के साथ में
जीवन चलनशील रहता है
और भावनाएं गतिहीन हो जाती हैं
तब संवेदनाओं को घर के आहाते में
आजीवन कारावास मिलता है
विस्मृति और शब्दाभाव
की इन परिस्थितियों में
अपनी ही चुप्पी से रिश्ता जुड़ जाता है
और मौन के साथ बना
सम्बन्ध ही
तल्लीनता से निभाया जाता है

83 comments:

  1. बड़े अजब संबंधों के पथ..

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  2. Wah,Monika ji!
    जन्म-जन्मान्तर के साथ में
    जीवन चलनशील रहता है
    और भावनाएं गतिहीन हो जाती हैं...
    Shaandaar...dil ko chhoo lene wali kavita hai.

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  3. सुंदर पंक्तियों के साथ .... बहुत सुंदर कविता ....

    निश्चित हो जाती हैं परिसीमायें
    पसर जाते हैं अनचाहे सन्नाटे
    जो भेद जाते हैं कहीं भीतर तक
    सिमट जाते हैं .... यह पंक्तियाँ बहुत ही अच्छी लगीं ....

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  4. मगर एक सशक्त अभिव्यक्ति का मुखर मौन है यह तो

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  5. जीवन चलनशील रहता है
    और भावनाएं गतिहीन हो जाती हैं
    तब संवेदनाओं को घर के आहाते में
    आजीवन कारावास मिलता है!
    अजीब बात है , हर रिश्ता कभी न कभी भावहीनता का सामना करता है , मिड लाईफ क्राइसिस जैसा ही , बस कुछ समय संभल जाए तो फिर वही जीवन्तता ...नहीं क्या !!

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  6. सच है......
    हृदयस्पर्शी भाव...

    अनु

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  7. यथार्थ अभिव्यक्ति!!
    निरंतर सम्वेदना पोषण के अभाव में उष्मा का होता ह्रास.......

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  8. संबंध बहुत नाजुक होते हैं, उन्हें निभाने में बड़ी जिम्मेदारी चाहिये.

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  9. और मौन के साथ बना
    सम्बन्ध ही
    तल्लीनता से निभाया जाता है

    सौ से ज्यादा फीसदी सच्ची पंक्तियाँ है.

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  10. और मौन के साथ बना
    सम्बन्ध ही
    तल्लीनता से निभाया जाता है

    सौ से ज्यादा फीसदी सच्ची पंक्तियाँ है.

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  11. मैं तो बस पढ़े जा रही हूँ और निशब्द हूँ ....
    शुभकामनायें !!

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  12. रिश्तों कि संवेदनशीलता को समझाती सुन्दर रचना !!

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  13. बस एक साथी दूजा न कोई ..

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  14. और मौन के साथ बना ये संबंध.... कितना बोलता है...कितना कष्टदायी होता है.... :(
    बहुतों की व्यथा बयान कर दी आपने...मोनिका जी !
    ~सादर!

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  15. बहुत सुन्दर...

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  16. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 20/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  17. अपनी ही चुप्पी से रिश्ता जुड़ जाता है
    और मौन के साथ बना
    सम्बन्ध ही
    तल्लीनता से निभाया जाता है..बहुत सटीक और यथार्थ भाव..

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  18. smbandhon ki Jatilta ka bhavpurn chitran........!!

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  19. बात तो बिल्कुल सही है, ऐसा समय हर किसी के साथ आता ही है.

    अगर संवादहीनता की स्थिति ना हो तो रिश्ते रिसने की बजाये फ़िर से हरे भरे हो जाते हैं, यही जीवन है.

    बहुत सुंदर लिखा, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  20. बात तो बिल्कुल सही है, ऐसा समय हर किसी के साथ आता ही है.

    अगर संवादहीनता की स्थिति ना हो तो रिश्ते रिसने की बजाये फ़िर से हरे भरे हो जाते हैं, यही जीवन है.

    बहुत सुंदर लिखा, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  21. स्थाई संबंधो की समाजिक मान्यता होती है,

    Recent Post: सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार,

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  22. यह सचमुच एक बड़ी विसंगति है!

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  23. और मौन के साथ बना
    सम्बन्ध ही
    तल्लीनता से निभाया जाता है
    बहुत सही कहा आपने ...
    आभार इस प्रस्‍तुति के लिये

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  24. बहुत ही सुन्दर भाव लिए बेहतरीन प्रस्तुति,आभार.

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  25. गहन भावों को समेटे सुन्दर पोस्ट।

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  26. गूढ़ होते संबंधों की सरल व्याख्या ।

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  27. शायद हर भावना को एक दिन कैद होना पड़ता है -बहुत सुन्दर विचार
    latest post सद्वुद्धि और सद्भावना का प्रसार
    latest postऋण उतार!

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  28. सम्बन्धों का एक चेहरा है ये भी ...

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  29. वाह और आह .....
    वो पास बैठा था मेरे ...पर वो मेरा न था ...
    पर क्यों ?
    आज के टी.वी... इंटरनेट की देन......
    शुभकामनायें@

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  30. बहुत सही कहा..मोनिका जी

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  31. सार्थक और विचारपरक
    सुंदर प्रस्तुति
    बधाई

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  32. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (20-03-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  33. परिस्थितियां मजबूर कर देती हैं कुछ संबंधों को मौन के साथ निभाए जाने के लिए... सार्थक अभिव्यक्ति

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  34. बेहद उम्दा भाव ... सादर !


    आज की ब्लॉग बुलेटिन होली तेरे रंग अनेक - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  35. संबंधो की जटिलता उलझती ही जाती है ।
    बहुत सुन्दर कविता ।

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  36. वक़्त के साथ बदलते रिश्तों के मायने भी ...भावपूर्ण रचना

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  37. मर्मस्पर्शी भाव रचना के .

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  38. सच है यही तो है जीवन शायद इसलिए वो कहावत बनी होगी कि "रिश्ते बनाना बहुत आसान होता है लेकिन उन्हें निभा पाना उतना ही मुश्किल"।

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  39. स्थायी संबंधों की
    सामाजिक रुपरेखा जीवित रहती है
    पर शब्द खो जाते है
    शेष रह जाती है
    औपचारिकता
    संबंधों को निभाने की
    मन की नहीं
    बहुत ही सुन्दर अर्थ की लय से सजी कविता |

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  40. संबंधों का मौन कष्टदायी होता है,थोड़ी दूरियाँ और पर्याप्त अवकाश मुखर होने में सहायक हो सकता है.

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  41. सुंदर प्रस्तुति

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  42. Kahte hain ki zindagi rangon se bni hai,toh kuch rang fike bhi hote hain...
    Sundar rachna.

    Sadar

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  43. ’बरसों के साथ’
    फीका पडता है हर रंग----यह तो
    शास्वत सत्य है,परंतु एक शास्वत सत्य यह भी है
    मानवीय संवेदनाएं—समय के साथ और भी चटक
    होनी चाहिये---क्यों नहीं हो रहीं---एक प्रश्न?
    आएं एक कोशिश करें,पंसारी की दुकान से
    बसंती पुडिया लाकर,जीवन की चादर को
    रंग लें---एक आशा—एक स्वप्न.

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  44. पुराने रिश्ते कुछ यूं ही ठंडे हो जाते हैं, इन्हें अहसासों की गर्मी देनी जरूरी है......बहुत सुंदर रचना है आपकी

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  45. सीमाओं में सम्बन्ध की जीना एक कला है संभावनाओं में तो सभी जीते हैं और इसीलिए दुखी भी रहते हैं .

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  46. संबंध ऐसे हो वो भी बरसों बाद ... ये ठीक नहीं ... निबाहने में जिनको करना पड़े समझौता वो ठीक नहीं ...
    जबकि गहरे होने चाहियें ... मुखर होने चाहियें रिश्ते समय के साथ ...

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  47. मन की नहीं
    जगत की सुनने-सुनाने की.......बहुत अपनी सी पंक्तियां। अतिसुन्‍दर।

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  48. विस्मृति और शब्दाभाव
    की इन परिस्थितियों में
    अपनी ही चुप्पी से रिश्ता जुड़ जाता है

    ...बहुत गहन और सटीक अभिव्यक्ति...बहुत सुन्दर..

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  49. सुदंर कविता यथार्थ अभिव्यक्ति ।

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  50. बहुत ही गहन अभिव्यक्ति

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  51. masquerading all the way..
    beautiful expressions as ever :)

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  52. और भावनाएं गतिहीन हो जाती हैं
    तब संवेदनाओं को घर के आहाते में
    आजीवन कारावास मिलता है

    पीड़ादायक होती है ऐसी स्थिति ....खासकर हमारे बुजुर्गों को सहना पड़ता है ऐसा कारावास

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  53. हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं पर उतार इतना पीडादायक क्यूँ होता है ....सांसें चलतीं रहती हैं ...सीमाओं का कैदी हर एहसास अधूरा रह जाता है ...हृदयस्पर्शी रचना
    एक नजर के इंतज़ार में ...स्याही के बूटे ....

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  54. पता नहीं हम क्यों रिश्तों की गहराइयों में डूब ही नहीं पाते शायद हर कोई अपने मै के घेरों में किसी को प्रवेश करने ही नहीं देना चाहता वर्ना सब कुछ सरल आसान होता !

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  55. और मौन के साथ बना
    सम्बन्ध ही
    तल्लीनता से निभाया जाता है..sahi bat...

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  56. परी लोक फेंटेसी की दुनिया भी असली होती है .भाव जगत रागात्मकता का अपना संसार है .बनाए रहो एक और दुनिया भाव अनुभाव से परे .

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  57. आपकी लेखनी का ये अद्भुत रंग शायद मेरे सामने पहली बार - आया सुस्वागतम

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  58. सुदंर / यथार्थ अभिव्यक्ति .

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  59. वास्तविकताएं जीवन को अपने रंग देती चलती हैं...
    बेहतर...

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  60. वास्तविकताएं जीवन को अपने रंग देती चलती हैं...
    बेहतर...

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  61. उत्कृष्ट मानवीय संवेदनाओ का वास्तविक चित्रण...

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  62. उत्कृष्ट रचना मानवीय संवेदना का वास्तविक चित्रण ...........

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  63. bahut sunder. holi ki subhkamnayen! kripya mere blog par bhi ayen , apka swagat hai.

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  64. sunder rachna hai bahut kuchh kahi hui
    badhai
    rachana

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  65. संवेदना मूक है लेकिन मुखरित भी

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  66. हम अंजुमन में सबकी तरफ देखते रहे ....मगर
    बहुत बहुत सुन्दर पोस्ट ...
    होली की शुभकामनाएं ...

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  67. हम अंजुमन में सबकी तरफ देखते रहे ....मगर
    बहुत बहुत सुन्दर पोस्ट ...

    होली की शुभकामनाएं ...

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  68. बहुत सुन्दर...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  69. विस्मृति और शब्दाभाव
    की इन परिस्थितियों में
    अपनी ही चुप्पी से रिश्ता जुड़ जाता है
    और मौन के साथ बना
    सम्बन्ध ही
    तल्लीनता से निभाया जाता है !

    गहन यथार्थ ।

    होली की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  70. होली की हार्दिक शुभकामनायें!!!

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  71. बीते कितने बरस
    मन मगर ढूंढता रहा
    जब-जब सोचा,है पल यही
    बोले तुम,न मैने कहा!

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  72. शुक्रिया आपकी शानदार टिप्पणियों के लिए शुभकामनाओं के लिए .फाग मुबारक .जीवन का राग रंग मुबारक .विषाद ,करुणा और समझौता प्रस्फुटित होते हैं इस रचना की कोख से .

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  73. अच्‍छी कविता के लिए आभार, होली की ढेर सारी शुभकामनाएं

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  74. अच्‍छी कविता के लिए आभार, होली की ढेर सारी शुभकामनाएं

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  75. बहुत गहन अभिव्यक्ति मोनिका जी ...सच में संवाद से ही संवेदना बनाती है ....
    मैंने आपकी पोस्ट पढ़ी भी और कमेन्ट भी किया था ....पर यहाँ अपना कमेन्ट दिख नहीं रहा है ....!!नेट की गडबडी से कई बार कमेन्ट जाता भी नहीं है ....

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  76. रिश्तों का निभाना यही है..चुप्पी तोडना भी तो नहीं चाहते कई बार..

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  77. ytharth se parichay karaati adbud rachna...Prem se upja maun aur Maun se upja prem...

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  78. बस इतना ही कह सकता हू कि बहुत मार्मिक वर्णन किया है , एक एक शब्द और भाव दिल को छूता है, शुभकामनाये

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