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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

13 May 2012

तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री माँ



सच माँ 
सरल नहीं है तुझसा हो जाना 
समेटना स्वयं को  एक नियत 
परिधि में यूँ और 
दहलीज़ के भीतरी संसार में खो जाना 
सात्विक सोच लिए कर्म की क्यारी में 
नित नए संस्कार बोते हुए 
सींचना परम्पराओं को 
बनकर धुरी निभाना संबंधों को 
सरल-सहज भाव से 
अनगिनत वचनों में बंधकर 
रिश्तों का सेतु  बनकर 
घर के भेद छुपाने की निपुणता लिए
अपनों के जीवन की पगडण्डी को 
समतल करने की जुगत में 
स्वयं को खो  देने की दक्षता
जो तुझ में सदा से ही समाई है
धैर्य  और स्नेह की थांती को सहेजे 
सबकी चिंताओं को बुहारने की सोच  को 
 अपने जीवन  में उतारकर 
सुख  देकर सुख पाने का भाव 
 इतनी सरलता से कहाँ किसी का 
स्वभाव  बन पाता है 
सच  
तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री माँ 

98 comments:

  1. सुख देकर सुख पाने का भाव
    इतनी सरलता से कहाँ किसी का
    स्वभाव बन पाता है
    सच
    तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री माँ

    माँ के सम्पूर्ण जीवन का सार है इन पंक्तियों में .....बहुत सुंदर कविता लिखी है मोनिका जी ....
    शुभकामनायें ....!!

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  2. आपको पता नहीं...अनजाने में ही आप उस श्रेणी में पहुँच गयीं हैं...घर की परिधि से बाहर निकल कर...आज की नारी...द कम्प्लीट वुमेन बन गयी है...

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  3. आपकी बात ने दिल पे क्या असर किया है , बता नहीं सकता.

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  4. सच हैं ..माँ के लिए आपके उदगार जो एक माँ के ही हैं ....

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  5. माँ से बढ़कर दुनिया में कोई नहीं है ... रचना बहुत बढ़िया लगी...आभार

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  6. सचमुच बहुत कठिन है उसकी तरह बनना... ह्रदयस्पर्शी रचना...

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  7. बहुत सुंदर कविता लिखी है मोनिका जी
    MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

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  8. माँ सी तो एक माँ ही हो सकती है

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  9. सुंदर भाव.....!
    दुनिया की सब माँओं को प्रणाम....!

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  10. सच कहा मोनिका जी.."तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री माँ".. ह्रदयस्पर्शी रचना...

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  11. बहुत ही सुन्दर..हृदयस्पर्शी रचना...:-)
    happy mother's day....:-)

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  12. जींवन का सार इस कविता में समेट लिया है. बहुत सुंदर कविता. आभार.

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  13. जननी के लिए अप्रतिम उदगार .,हमारे शब्द पुष्प मातृ शःक्ति को अर्पण .

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  14. माँ बनकर यह ऋण उतारा जा सकता है..

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  15. सच कहा वैसा बनना बहुत कठिन है……सुन्दर प्रस्तुति

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  16. प्रभावशाली रचना...सुन्दर प्रस्तुति

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  17. प्रभावशाली रचना...सुन्दर प्रस्तुति

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  18. बढ़िया प्रस्तुति! आपकी कविता में भाव की बहुलता इसे पठनीय बना देती है । माँ तुझे सलाम। मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद

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  19. माँ ने जिन पर कर दिया, जीवन को आहूत
    कितनी माँ के भाग में , आये श्रवण सपूत
    आये श्रवण सपूत , भरे क्यों वृद्धाश्रम हैं
    एक दिवस माँ को अर्पित क्या यही धरम है
    माँ से ज्यादा क्या दे डाला है दुनियाँ ने
    इसी दिवस के लिये तुझे क्या पाला माँ ने ?

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  20. वाह! बहुत ही भावपूर्ण रचना है,बधाई आप को

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  21. waah! bahut umda!

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  22. सुख देकर सुख पाने का भाव
    इतनी सरलता से कहाँ किसी का
    स्वभाव बन पाता है
    सच
    तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री माँ
    सुंदर कविता

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  23. बहुत ही सुन्दर रचना!

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  24. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.


    माँ के लिए ये चार लाइन
    ऊपर जिसका अंत नहीं,
    उसे आसमां कहते हैं,
    जहाँ में जिसका अंत नहीं,
    उसे माँ कहते हैं!

    आपको मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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  25. माँ का अहसास माँ बनकर ही समझा जा सकता है.

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  26. ...बहुत सुंदर कविता लिखी है मोनिका जी
    बेहतरीन शब्द रचना बधाई

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  27. वाह! बहुत ही सुन्दर कविता... वाकई... माँ जैसा बनना तो बहुत ही कठिन है....

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  28. सरल नहीं है तुझसा हो जाना
    समेटना स्वयं को एक नियत
    परिधि में यूँ और
    दहलीज़ के भीतरी संसार में खो जाना
    बहुत सुन्दर कविता है मोनिका जी.

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  29. कठिन नहीं असंभव ही है ,माँ जैसा हो पाना |

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  30. अच्छी पोस्ट!
    --
    मातृदिवस की शुभकामनाएँ!

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  31. माँ के प्यार में निस्वार्थ भाव को समेटती आपकी खुबसूरत रचना....माँ तो सिर्फ माँ होती है....

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  32. उनके जैसा कोई नहीं ....

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  33. मदर्स डे की शुभकामनायें ...........बहुत सुन्दर भाव

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  34. सुन्दरता से बात कही...मातृ दिवस की बधाई.

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  35. धैर्य और स्नेह की थांती को सहेजे
    सबकी चिंताओं को बुहारने की सोच को
    अपने जीवन में उतारकर
    सुख देकर सुख पाने का भाव
    इतनी सरलता से कहाँ किसी का
    स्वभाव बन पाता है

    माँ के प्रति मन के भाव पूर्ण उद्गार ... बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  36. माँ को शत शत नमन .....

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  37. माँ नें ममता इसलिए नहीं लुटाई कि बदले में आभार व्यक्त हो, वह निस्वार्थ ममता आगे से आगे ममता के प्रसार के सोद्देश्य से है।

    मातृदिवस पर अनेको शुभकामानाएं

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  38. भागमभाग जिन्दगी की थकान को एक ही पल में मीता देने वाला शब्द "माँ" ही है | अच्छी रचना |

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  39. तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री माँ

    बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति...सच में माँ जैसी बनना कठिन हे.

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  40. माँ सा हो पाना मुश्किल है मगर हर स्त्री अपनी माँ का ही प्रतिरूप हो जाती है !

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  41. आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १५ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

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  42. मदर्स दे पर ये रचना सचमुच सम्मान है और कृतज्ञता भी

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  43. मदर्स दे पर ये रचना सचमुच सम्मान है और कृतज्ञता भी

    ReplyDelete
  44. मदर्स दे पर ये रचना सचमुच सम्मान है और कृतज्ञता भी

    ReplyDelete
  45. Mother - the bank where we deposit all our hurts and worries.
    bahut sundar rachna ....

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  46. मन को छूती हुई भावमय प्रस्‍तुति।

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  47. माँ सा तो कोई नहीं हो पाता ... पर जब आप खुद माँ हैं तो माँ का सा जरूर हो सकती हैं ...
    इतना त्याग और इतना दुलार बस माँ ही दे सकती है ... नमन है हर माँ को ...

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  48. आपकी पोस्ट के तो शीर्षक ने ही सारी बात कह दी...जो व्यक्तित्व दिखने में सादा हो ज़रूर नहीं की वह वास्तव में भी उतना आसान भी हो।

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  49. सच है मां जैसी बन पाना मुश्किल है,
    लेकिन यह बात हर पीढ़ी की बेटियों के लिए सही है।

    अच्छी विचारगाथा।

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  50. मां की जगह कोई नहीं ले सकता.... कोई भी नहीं......
    मां..............

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  51. .

    सच ,
    तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री मां !

    बहुत सुंदर…
    भाव विह्वल कर देने वाली रचना लिखी है मोनिका जी !
    मां के लिए लिखते मन भी नहीं भरता …
    और यह भी सच है कि
    मां के लिए कितना भी विस्तार से लिख लें , कम ही होगा …
    *************************************
    ¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤
    नमन है मां को !
    नमन है मेरी मां को !
    नमन है आपकी मां को !
    नमन है संसार की प्रत्येक मां को !

    मां तुझे शत शत प्रणाम !
    ¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤
    *************************************
    इस सुंदर प्रेरक रचना के लिए आभार आपका !

    मंगलकामनाओं सहित…
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  52. बहुत ही सुंदर भाव...सुन्दर प्रस्तुति...हार्दिक बधाई...

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  53. मां...एक ऐसा शब्द, जो मंत्र है...केवल यही एक शब्द है, जो निरंतर हृदय से निकलकर ‘परमहंस’ बना देता हैं

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  54. शायद ही कुछ बाक़ी रहा कहने को।

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  55. माँ ..तो माँ ही हैं ...चाहे वो मेरी ..आपकी या आज कल के वक्त की माँ ही क्यों ना हो ...हमेशा ही माँ रहेगी ...

    माँ को सोच कर लिखी गई सम्पूर्ण रचना ...बहुत खूब

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  56. सचमुच माँ हमेँ ईश्वर की सर्वोत्तम देन है।
    बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  57. अनगिनत वचनों में बंधकर
    रिश्तों का सेतु बनकर
    घर के भेद छुपाने की निपुणता लिए
    अपनों के जीवन की पगडण्डी को
    समतल करने की जुगत में
    स्वयं को खो देने की दक्षता
    जो तुझ में सदा से ही समाई है

    wah kya bat hai

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  58. dदुनिया का वज़ूद ही माँ से है सिन्दर रचना/

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  59. माँ जैसा कौन हो सकता है...बहुत सुन्दर रचना...

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  60. आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

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  61. सुख देकर सुख पाने का भाव
    इतनी सरलता से कहाँ किसी का
    स्वभाव बन पाता है
    अतुलनीय ही रहेगी माँ .माँ की तुलना भी माँ से ही हो सकती है .बस .

    ReplyDelete
  62. सुख देकर सुख पाने का भाव
    इतनी सरलता से कहाँ किसी का
    स्वभाव बन पाता है
    अतुलनीय ही रहेगी माँ .माँ की तुलना भी माँ से ही हो सकती है .बस .

    ReplyDelete
  63. धैर्य और स्नेह की थांती को सहेजे
    सबकी चिंताओं को बुहारने की सोच को
    अपने जीवन में उतारकर
    सुख देकर सुख पाने का भाव
    इतनी सरलता से कहाँ किसी का
    स्वभाव बन पाता है
    सच
    तुझसा बनना तो बड़ा कठिन है री माँ

    True, wonderful composition!!

    Regards
    Fani Raj

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  64. कठिन तो है पर माँ बनने पर किसी भी कठिनाई से नेह सा जुड़ जाता है..

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  65. प्रभावशाली रचना...सुन्दर माँ के अहसासों अभिव्यक्ति,...

    MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,
    MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

    ReplyDelete
  66. माँ कभी मरती नहीं है बेटी में रहती है .बेटा उसे ताउम्र ढूंढता रहता है .

    ReplyDelete
  67. माँ कभी मरती नहीं है बेटी में रहती है .बेटा उसे ताउम्र ढूंढता रहता है .

    ReplyDelete
  68. माँ कभी मरती नहीं है बेटी में रहती है .बेटा उसे ताउम्र ढूंढता रहता है .

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  69. वाह ..!
    आप तो कविता भी बहुत अच्छी लिखती हैं ...
    फिर लिखती क्यों नहीं ....?

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  70. थोड़े से शब्दों में माँ की पूरी विशेषताए , सागर में गागर माँ को नमन !

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  71. मदर्स पे लिखी ये कविता शानदार और एकदम परफेक्ट है!!! :)
    मैं क्या, हर कोई आपसे सहमत होगा!! :)

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  72. जननी का स्वरूप अपरिमित है। उसे कितना भी गाया जाये...बहुत कुछ बच जायेगा, जो अगेय है।
    जैसा कि आपने लिखा है कि आप फुलटाइम माता का धर्म निभा रहीं हैं,तो आप मुझसे बेहतर समझती होगीं।
    बहुत ही भावपूर्ण रचना...

    दीदी , मैने अभी अभी ब्लोग लिखना शुरु किया है
    कभी पधारें..स्वागत है

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  73. माँ के प्यार की कोई तुलना नहीं.सच में.

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  74. संवेदना से भरपूर रचना |
    आशा

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  75. सुन्दर प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपकी प्रतीक्षा रहेगी । धन्यवाद ।

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  76. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  77. aapki ess post se muje satmev jayte ka pehla apicosde yaad aa gaya aapne acha lekha hai

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  78. waakai... MAA jaisa ban pana bahut hi mushkil hai, ya kahiye near to mpossible hai... par usme ek khaas baat aur hoti hai, wo apni betiyon mei apna pratibimb dekhti hai... :)
    yahi kya kam hai... :)
    bahut acchi poem...

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  79. जीवन भर रहती बनी धरा
    देना बिन व्यक्त किए पीड़ा

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  80. बहुत सुंदर रचना ...!!

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  81. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति । आपका मेरे पोस्ट पर आगमन मेरे मनोबल को बढ़ाता है । इसलिए अनुरोध है कि मेरे नए पोस्ट "कबीर" पर आकर मुझे प्रोत्साहित करें । धन्यवाद ।

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  82. और इसीलिए एक अप्राप्य की तरह तू आज भी मेरे साथ है मेरी हर तलाश में ,आस में ,उजास में . ,बढ़िया प्रस्तुति ,शानदार .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    रविवार, 27 मई 2012
    ईस्वी सन ३३ ,३ अप्रेल को लटकाया गया था ईसा मसीह
    .
    ram ram bhai
    को सूली पर
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    तथा यहाँ भी -
    चालीस साल बाद उसे इल्म हुआ वह औरत है

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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  83. Very nice post.....
    Aabhar!
    Mere blog pr padhare.

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  84. man ki mahima ko ujagar karti sunder post...

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  85. सामाजिक मुद्दों पर आपकी लेखनी चलती रहती है थमती नहीं है नै रचना अपेक्षित /प्रतीक्षित .आभार आपकी ब्लॉग हाजिरी के लिए जो हमारा उत्साह वर्धन करती है अनुप्राणित करती है लेखन को .
    कृपया यहाँ भी पधारें -


    ram ram bhai

    बुधवार, 30 मई 2012
    HIV-AIDS का इलाज़ नहीं शादी कर लो कमसिन से

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    कब खिलेंगे फूल कैसे जान लेते हैं पादप ?

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  86. शायद रिश्तों में कहीं न कहीं स्वार्थ होता है.. माँ-संतान के रिश्ते को छोड़ कर....

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  87. माँ एक गुणवाचक भाव वाचक संज्ञा है एक तत्व है जिसकी ज़ेरोक्स तैयार नहीं हो सकती .माँ विशिष्ठ होती है सबकी .बहुत शुक्र गुज़ार हूँ आपकी ब्लोगिया दस्तक का .

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  88. बहुत कठिन है माँ जैसे होना ....
    बहुत सुन्दर रचना !

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  89. बहुत सुंदर । मेरी कामना है कि आप निरंतर सृजनरत रहें । धन्यवाद ।

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  90. saral shabdo me saral si maa ki chaavi uker di hai apne

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  91. आपकी कविता में भावों की गहनता व प्रवाह के साथ भाषा का सौन्दर्य भी उपस्थित है , अद्भुत लेखन


    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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  92. आपकी कविता में भावों की गहनता व प्रवाह के साथ भाषा का सौन्दर्य भी उपस्थित है , अद्भुत लेखन


    http://madan-saxena.blogspot.in/
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