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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

21 December 2011

मनुष्यता के मोर्चे ......!



कभी तो निकलें  
मनुष्यता के मोर्चे 
मोर्चे जिनमें केवल 
महिला-पुरुष की बात ना हो 
ना ही नारे लगें एक धर्म की जय 
और दूसरे की पराजय के 
समानता ,असमानता का  स्वर 
लिंगभेद को आधार बनाकर न गूंजे 
जीवन के प्रसंग ऊंच- नीच , जात-पात 
तक ही ना सिमट जाएँ
मोर्चे जो भीड़ की सार्थकता दर्शायें 
जिनमें स्वार्थ की खोटी नहीं 
परिवर्तन की खरी-खरी  बातें हों 
मोर्चे जिनमें मनुष्यता के भी 
नारे लगें समर्पित सोच के साथ 
हो बस मानवता की बात
मोर्चे जो सद्भाव की सरिता बहायें 
हर क्रूर व्यवहार का विरोध करते  
दुर्भाव की कालिमा को छांटते
बिना किसी भेदभाव के 
परिवर्तन लायें, परिष्कृत करें 
मानव के व्यवहार को 
जिनमें राजनीतिक-धार्मिक स्वार्थ 
का कोलाहल नहीं
मानवीय संवेदनाओं का स्वर हो 
जब निकलेंगें ऐसे मोर्चे
तो  निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा  
तब मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं 
मानव के व्यवहार में मिलेगी ....!


112 comments:

  1. जब निकलेंगें ऐसे मोर्चे
    तो निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा
    तब मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं
    मानव के व्यवहार में मिलेगी ....!
    Bahut sundar! Aameen!Aapkee yatra sukhdaayee rahe ye kamna kartee hun.

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  2. Monica ji..

    Chhod ke saare dambh, virodh...
    Manav dharm hum apnayen....
    Chhota-bada na mahila-bachcha..
    Ek sootr main bandh jaayen...

    Vicharneeya aalekh....

    Aapki safal yatra ke liye shubhkamnayen.....aur haan..vapasi par ek yatra sansmaran le kar aayen to hum jaise ghar baithe hi yatra ka aanand utha lenge....

    Shubh yatra..

    Deepak Shukla..


    Manavta ke dharm main saare...

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  3. आज के समय में हमारे देश में यह बात भूल ही जाएँ ... लगने लगा है कि हरसंभव जाति ,धर्म , प्रदेश और लिंग का पेंच अडाये बिना तो यहाँ हवा भी नहीं चलती !

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  4. बहुत सुंदर भाव और उतनी ही सुंदर अभिव्यक्ति ....
    बहुत बधाई मोनिका जी ....ऐसे मोर्चे में हम भी आपके साथ होंगे ....
    शुभयात्रा ....और शुभकामनायें.

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  5. जब निकलेंगें ऐसे मोर्चे
    तो निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा ... yakeenan

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  6. Seriously that would be a true movement. Nicely written:)

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  7. Bahut sunder aise morche to hai gali har nukkad par nikalne chahiye. Jis din aisa ho gaya us din manavta ka ek maatra rajya sthapit ho jayega.

    Aameen. . . . . . !

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  8. जब तक बाटने वाले शब्द रहेंगे और बटने को तैयार मन रहेंगे, लोग बटते रहेंगे।

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  9. एकदम बराबर बात कही आपने ।

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  10. प्रभावशाली रचना......

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  11. मोर्चे जो सद्भाव की सरिता बहायें
    हर क्रूर व्यवहार का विरोध करते
    दुर्भाव की कालिमा को छांटते
    बिना किसी भेदभाव के
    परिवर्तन लायें, परिष्कृत करें

    सद्भावना निर्मल हृदय से व्यक्त हुई है। शुभकामनाएं

    आपकी यात्राओं के लिए भी

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  12. आप सब की यात्राएं शुभ एवं मंगलमय हो।

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  13. बहुत सुन्दर !
    manojbijnori12.blogspot.com

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  14. बहुत प्रभावशाली रचना...

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  15. मानव के व्यवहार में मनुष्यता..अब खोजना पड़ता है .

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  16. यात्रा की शुभकामनायें....... जल्दी लौटियेगा, प्रतीक्षा रहेगी.

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  17. जब निकलेंगें ऐसे मोर्चे
    तो निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा
    अक्षरश: सही कहा है आपने ..आभार ।

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  18. मोर्चे जो भीड़ की सार्थकता दर्शायें
    जिनमें स्वार्थ की खोटी नहीं
    परिवर्तन की खरी-खरी बातें हों...
    प्रभावशाली रचना.

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  19. कविता बहुत अच्छी लगी!!

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  20. बिना भेद भाव के ही मनुष्यता को जगाया जा सकता है.

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  21. बहुत सही और सटीक बात कही..ऐसे मोर्चे में हम भी आपके साथ हैं मोनिका जी ....शुभयात्रा..

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  22. नाम सुनतें हैं आज भी सद्भावना मोर्चे .लेकिन आदर्श हमारा कुछ और है .

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  23. बहुत सच कहा है..आज जरूरत है ऐसे ही मोर्चों की...

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  24. सुन्दर भाव लिए ख़ूबसूरत रचना...

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  25. कभी तो निकलेंगे ऐसे मोर्चे...
    उम्मीद पर दुनिया कायम है.

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  26. समझ नहीं आता कहाँ से चयन करू की क्या अच्छा लगा............पूरी की पूरी पोस्ट ही बेजोड़ और सच्ची है.....ऐसी ही सोच की आवश्यकता है परिवर्तन के लिए........हैट्स ऑफ इस पोस्ट के लिए|

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  27. बहुत अच्छी लगी यह कविता।
    Welcome to Bharat!

    सादर

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  28. सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति है ...
    आपकी यात्रा सुखद हो ...

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  29. वाह...कमाल की नज़्म कही है आपने...बधाई

    नीरज

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  30. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....
    .........शुभयात्रा :)

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  31. हम मनुष्य अपनी मनुष्यता को तो धीरे -धीरे भूलते ही जा रहें हैं ......सार्थक प्रस्तुति
    आपकी यात्रा मंगलमय हो ,बहुत -बहुत शुभकामनाएँ

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  32. यकीन है कि कुछ बदलाव जरुर आएगा

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  33. रामराज की एक चिरन्तन चाहत ......आपकी यात्रा शुभ और आरामदायक हो ..भारत आयें तो खबर करें !

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  34. बहुत सुंदर भाव ...

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  35. kabhi kabhi lagta hai aisa jaroor hoga ek din.

    aapke sath sath ham bhi intzar me hain.

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  36. जरूर हम सभी मिलकर निकलेगें और परिवर्तन लायेंगे |

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  37. ## मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं
    मानव के व्यवहार में मिले ##
    I wish to see this day :)
    loved the tile of this post !!
    and new look of the blog is very appealing :)

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  38. ekdam satik baat
    prabhavshali rachana....
    shubh yatra...

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  39. इस शुभाकांक्षा में आपके साथ.

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  40. कोलाहल नहीं
    मानवीय संवेदनाओं का स्वर हो
    जब निकलेंगें ऐसे मोर्चे
    तो निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा
    तब मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं
    मानव के व्यवहार में मिलेगी ....!

    ईश्वर करे ये उद्गार सत्य में परिणित हों....

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  41. बहुत सुंदर भाव और उतनी ही सुंदर अभिव्यक्ति. बधाई मोनिका जी

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  42. A vision of change in your poem ,, so powerful..:)

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  43. बहुत ही अच्छे विचार जी ...

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  44. मोर्चे की ज़रूरत ही समस्या के समाधान के लिए होती है। जब कोई समस्या ही न रही-न धार्मिक,न लैंगिक,न भावगत और न व्यवहारगत,तो फिर मोर्चे की ज़रूरत कहां रहेगी? जहां तक मेरी समझ है,भीड़ हमेशा व्यक्ति को कुंद करती है। व्यक्ति एकांत में ही सार्थक होता है।

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  45. बहुत सुन्दर, सार्थक प्रस्तुति, आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें, प्रतीक्षा रहेगी .

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  46. बिना किसी भेदभाव के
    परिवर्तन लायें, परिष्कृत करें
    मानव के व्यवहार को
    जिनमें राजनीतिक-धार्मिक स्वार्थ
    का कोलाहल नहीं
    मानवीय संवेदनाओं का स्वर हो

    BEHTAREEN PRASTUTI.

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  47. कल 23/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  48. सार्थक सोच को सलाम ...
    शुभकामनाएँ!

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  49. khoobsoorat lekhan..
    yatharth darshan..
    jo kaiyon ko nahin dikhta...

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  50. सारगर्भित अभिव्यक्ति ...आभार समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://aapki-pasand.blogspot.com/2011/12/blog-post_19.html
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  51. थोड़ा मुश्किल जरूर है ,पर असम्भव नही....

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  52. बहुत सुंदर विचार...
    आपसे सहमत.

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  53. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति ...शुभकामनाएँ !

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  54. सार्थक... सुन्दर रचना...
    सादर

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  55. सही है कभी तो निकले ऐसे भी मोर्चे...
    जब निकलेंगें ऐसे मोर्चे
    तो निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा
    सुन्दर रचना...आभार

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  56. मेरी टिप्पणी आपके मॉडरेशन का शिकार हुई मालूम होती है। अलविदा।

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  57. तो निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा
    तब मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं
    मानव के व्यवहार में मिलेगी ....!
    परिवर्तन तो तभी आएगा ...जब चीज़ें शब्दों में न रहकर व्यवहार में उतरेंगी

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  58. बात आपने अच्छी कही है लेकिन हर अच्छी बात मात्र एक आदर्शीकरण आइदियेलाइज़ेशन है .आदर्श गैस सा घर्षण हीन पिस्टन सा परफेक्ट गैस सा .

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  59. आपकी मनोकामना अवश्य पूरी हो, क्योंकि यही हमारी भी अंतर्मन की कामना है...

    मन ko छू लेने वाली सार्थक इस अभिव्यक्ति ke liye sadhuwaad...

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  60. तब मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं
    मानव के व्यवहार में मिलेगी ....!
    काश ऐसा हो

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  61. जिनमें राजनीतिक-धार्मिक स्वार्थ
    का कोलाहल नहीं
    मानवीय संवेदनाओं का स्वर हो
    जब निकलेंगें ऐसे मोर्चे
    तो निश्चित ही बहुत कुछ बदलेगा
    तब मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं
    मानव के व्यवहार में मिलेगी ....!
    Vah Monika ji ak nye srijan ki kamana se ot prot rachan ...bahut bahut abhar.

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  62. आपके पोस्ट पर आना सार्थक हुआ । बहुत ही अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट "उपेंद्र नाथ अश्क" पर आपकी सादर उपस्थिति प्रार्थनीय है । धन्वाद ।

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  63. निकलेंगे जरूर निकलेंगे मनुष्यता के मोर्चे,
    इस तरह की रचनाओं को पढ़कर होंगे लोग जागरूक,
    भुला देंगे भेद लिंग जाति धर्म का,
    इस तरह की रचनायें लिखकर,
    करते रहना होगा प्रयास।
    जागृति लाने वाली सुन्दर रचना निश्चित ही
    सराहनीय है।

    ReplyDelete
  64. निकलेंगे जरूर निकलेंगे मनुष्यता के मोर्चे,
    इस तरह की रचनाओं को पढ़कर होंगे लोग जागरूक,
    भुला देंगे भेद लिंग जाति धर्म का,
    इस तरह की रचनायें लिखकर,
    करते रहना होगा प्रयास।
    जागृति लाने वाली सुन्दर रचना निश्चित ही
    सराहनीय है।

    ReplyDelete
  65. यह समां बदलेगा, बहारें फिर आएँगी !! बहुत बहुत सुन्दर लेखनी !! बधाई

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  66. मोनिका जी!!!!!!!!बहुत खूब
    सुंदर भावों की बेहतरीन अभिव्यकित.....

    मेरे नए पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"--में click करे

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  67. bas usi morche ka intjar hain achchi sarthak rachna

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  68. अच्छी रचना शुभकामनायें !
    आने का इंतजार रहेगा शुभयात्रा !

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  69. sundar vichaar;;
    sarvottam sabdon me;;;

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  70. आपने सच कहा,.. बेहतरीन आलेख ,......
    नए साल की शुभकामनाए .......

    मेरे पोस्ट के लिए --"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"-- मे click करे

    ReplyDelete
  71. बहुत अच्छी प्रस्तुति ...

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  72. रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  73. बेहतरीन प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । . नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

    ReplyDelete
  74. बहुत सुंदर प्रस्तुती बेहतरीन रचना,.....
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाए..

    नई पोस्ट --"काव्यान्जलि"--"नये साल की खुशी मनाएं"--click करे...

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  75. बहुत बढ़िया प्रस्तुति....नववर्ष आगमन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ...

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  76. नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

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  77. बहुत सुन्दर सार्थक और प्रेरक प्रस्तुति है आपकी.
    काश! ऐसा सच में हो जाये.

    नव वर्ष की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  78. मनुष्यता व्यवहार में परिलक्षित होनी चाहिए।
    बहुत अच्छी बात।
    शुभ नववर्ष !

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  79. इस अवसर पर वश यही कहूँगा ---भगवान सभी के दिल में शांति और सहन की शक्ति दें ! मै और मेरी धर्मपत्नी की ओर से आप सभी को सपरिवार -नव वर्ष की शुभ कामनाएं !

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  80. बहुत सुन्दर रचना.
    नए वर्ष की हार्दिक बधाई.

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  81. नववर्ष की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ

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  82. आप को सपरिवार नव वर्ष 2012 की ढेरों शुभकामनाएं.

    इस रिश्ते को यूँ ही बनाए रखना,
    दिल मे यादो क चिराग जलाए रखना,
    बहुत प्यारा सफ़र रहा 2011 का,
    अपना साथ 2012 मे भी इस तहरे बनाए रखना,
    !! नया साल मुबारक !!

    आप को सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया, आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ, एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से नया साल मुबारक हो ॥


    सादर
    आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
    एक ब्लॉग सबका

    आज का आगरा

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  83. लिंग भेद की गम्भीर समस्या को कविता के
    माध्यम स् उठाने का सार्थक एवं सफल प्रयास।
    नये वर्ष की हृार्दिक शुभकामनायें।

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  84. @ Kumar radhramanji

    :) Ytra ke chalte kai din baad net par aana hua..... Vichar sahmati ke hon ya asahmati ke main tippaniyon me aaye vicharon ka bahut samman karati hun..... isliye unhen modarate nahin karati ...aapke vichar to sadaiv vishay ko naya vistar dete hain..... Abhar

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  85. बेहतरीन सचना. आभार.

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  86. बढ़िया लिखा है आपने। बधाई।

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  87. जब तक बाटने वाले शब्द रहेंगे और बटने को तैयार मन रहेंगे, लोग बटते रहेंगे।
    bahut sahi kaha aapne.

    meri new post chup hoon par jaane ke liye click karain...
    http://dilkikashmakash.blogspot.com/2012/01/blog-post_04.html

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  88. मनुष्यता मात्र शब्दों में नहीं, मानव के व्यवहार में मिलेगी। आमीन।

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  89. abhar monika ji ....bahut hi sundar pravishti .

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  90. आपको नववर्ष की शुभकानाएं...लगता है आप भी लापतागंज में हैं आजकल

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  91. एक अच्छी रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ |

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  92. sarthak aur sateek rachna...bahut khoob :)

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  93. very nice...
    excellent expression.

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  94. Bilkul samanta or sammaan se jeene ki ye bhaawna jarur jeetengi. sundar kavita :)

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  95. Wah! bahut hi achcha likha hai aapne! .. :)

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  96. ekdum sateek va satya jhalak rha hai is blog se........kash k sabhi esa sochen......bahut-2 badhayi is lekh k liye.....

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  97. ekdum sateek evam satya ......bahut khoobsoorat evam manveeya rachna :)

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  98. खूबसूरत, प्रभावित एवं आकर्षित करती हुई रचना....अत्यधिक सराहनीय.......
    कृपया इसे भी पढ़े
    नेता,कुत्ता और वेश्या

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