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पढ़ने लिखने में रुचि रखती हूँ । कई समसामयिक मुद्दे मन को उद्वेलित करते हैं । "परिसंवाद" मेरे इन्हीं विचारों और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है जो देश-परिवेश और समाज-दुनिया में हो रही घटनाओं और परिस्थितियों से उपजते हैं । अर्थशास्त्र और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नात्तकोत्तर | हिंदी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाजिक विज्ञापनों से जुड़े विषय पर शोधकार्य। प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ( समाचार वाचक, एंकर) के साथ ही अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा | प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के परिशिष्टों एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित | संप्रति समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन । प्रकाशित काव्य संग्रह " देहरी के अक्षांश पर "

ब्लॉगर साथी

29 November 2010

माँ जीती कम जागती ज़्यादा है...!


माँ ...!
जीवन जीती कम जागती ज़्यादा है.....!

माँ ...!
खरीदती कम हिसाब लगाती ज़्यादा है....!

माँ ...!
हंसती-गाती कम मुस्कुराती ज़्यादा है....!

माँ ...!
बोलती कम मन में बुदबुदाती ज़्यादा है...!


माँ ...!
हिदायतें देती कम दोहराती ज़्यादा है....!

माँ ...!
सब समझकर भी सोचती ज़्यादा है....!


माँ ...!
सजती कम संवारती ज़्यादा है...!

माँ...!
रूठती कम मनाती ज़्यादा है.....!

माँ ...!
देखती कम नज़र उतारती ज़्यादा है....!
माँ ...!
जताती कम निभाती ज़्यादा है....!

माँ ...!
कहती कम समझती ज़्यादा है...!

103 comments:

  1. सार्थक, माँ बस माँ होती है

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  2. मोनिका जी,

    सुभानाल्लाह......सच 'माँ' ऐसी ही होती है|

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  3. माँ ऎसी ही होती है!बिलकुल सच कहा आपने.

    दिल को छू लेने वाली कविता!


    सादर-

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  4. maa !samajhti jyada hai !....bahut bhavpurn rachna .shubhkamnaye swikar kare !

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  5. सच मां तो बस ऐसी ही होती है ....।

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  6. माँ को लेकर सब की भावनाएं एक जैसी ही होती है. हो भी क्यूँ नहीं, माँ चीज़ ही ऐसी होती है. कुछ महीने पहले मैंने भी माँ पर एक कविता लिखने का प्रयास किया था. माँ ऐसी ही होती है, थोड़ी सी सीधी, थोड़ी अजीब होती है

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  7. माँ ऐसी ही होती है।

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  8. इतनी ममतामयी रचना के लिये आपको प्रणाम।

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  9. बहुत सुन्दर रचना ...माँ ऐसी ही होती है इसी लिए उस पर लिखी हर कविता प्रार्थना सी होती है ..

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  10. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी इस रचना का लिंक मंगलवार 30 -11-2010
    को दिया गया है .
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

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  11. mujhe meri maa ki yaad aa gayi jab se yaha hostel lai aaya hu ma ke haath ke khane ko hi taras gaya.....
    mom u r great
    n thanks monika ji itni acchi rachna oadane ke liye..

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  12. बहुत सार्थक और अच्छी सोच ....माँ तो माँ है. बहुत अच्छी कविता।

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  13. माँ तो सिर्फ माँ होती है ..उसकी भावनाओं को हम समझ नहीं पाते, जितना भी माँ के बारे में कहा जाये ..सोचा जाये ...उतना कम है .....उसकी भावनाओं को शब्दों में कहना कोई आसन बात नहीं
    ....सार्थक पोस्ट ..शुभकामनायें

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  14. सही कहा...........
    सुन्दर पंक्तियों को उकेरा है आपने ........

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  15. प्यार दिखाती कम है करती ज्यादा है

    बहुत अच्छी कविता |

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  16. भावुक कर देने वाली प्रस्तुति !

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  17. डाक्टर साहेब । मां के वाबत बहुत अच्छी व्याख्या। रुठती कम मनाती न्यादा,निभाती ज्यादा, सोचती ज्यादा , कम हंसती है जागती ज्यादा है मगर क्या करियेगा । समय ऐसाआता जा रहा है कि मां के उपर बंटबारे के दावे विचाराधीन है

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  18. माँ को समझने का अच्छा प्रयास.. लेकिन जितना कहें कम है...

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  19. बिलकुल सच कहा आपने.माँ बस माँ होती है

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  20. मां तो मां होती है...अपनी संतानों के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाली।
    सराहनीय प्रस्तुति।

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  21. सच में माँ ऐसी ही होती है ! इसीलिए माँ भूलती नहीं है ! धन्यवाद मोनिका सुंदर कविता के लिए

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  22. उनके साथ अनुभवों का जखीरा जो है ....

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  23. माँ! सारे घर का बोझ अकेले उठाती है!

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  24. एक और बात मोनिका जी ! :)
    माँ इंसान कम है माँ ज्यादा है :)
    बेचारी को इंसान समझता ही कौन है फिर भी माँ के फ़र्ज़ से कभी नहीं डिगती वो.
    बहुत ही बढ़िया रचना.

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  25. डॉक्टर मोनिका जी !
    आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया .......कनाडा में रहकर भी आप पूरी तरह भारतीय से भी अधिक भारतीय माँ हैं ........माँ के व्यक्तित्व ....उसकी भूमिका पर भाव भरा .......सार्थक चिंतन.......
    माँ और बच्चे के संबंधों पर समसामयिक लेख .......मम्मियां अपने जीवन में इसे अपनाएँ ........शुभ कामनाओं के साथ .....

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  26. कमाल की रचना ममता भरी ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  27. माँ तो फिर माँ है. भिगो दिया आपने..

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  28. माँ होती ही ऐसी है कि हर दुःख को अपने तक ले ले और सिर्फ सुख देखने को मिले बेटों को . माँ पर बहुत ही सुंदर प्रस्तुति

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  29. माँ पढ़ती कम ,
    पढ़ाती ज्यादा है .

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  30. माँ बनने के बाद अपने से ज्यादा महत्व बच्छो को देती है. महाजन कि तरह जिसे मूल से ज्यादा ब्याज प्यारा होता है....
    माँ के बारे में जितना कहा जाए कम है.....

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  31. मोनिका जी !
    नमस्कार !
    माँ बस माँ होती है माँ पर बहुत ही सुंदर प्रस्तुति

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  32. आदरणीया डॉ॰ मोनिका शर्मा जी
    सुप्रभात !
    बीच में कई बार आपके यहां आया हूं …
    आज उपस्थिति दर्ज़ कर रहा हूं

    मां शब्द मुझे बहुत प्रभावित करता है । मां नाम से ही मेरे मन में भावनाओं का सागर हिलोरें लेने लगता है …
    आपने
    "माँ जीती कम, जागती ज़्यादा है...!"
    रचना के माध्यम से आत्मा को स्पर्श किया है ।

    माँ ...!
    जताती कम निभाती ज़्यादा है....!


    हर पंक्ति प्रभावशाली है , आभार !

    मेरे एक गीत की स्थायी आपको सादर समर्पित है …
    हृदय में पीड़ा छुपी तुम्हारे , मुखमंडल पर मृदु - मुसकान !
    पलकों पर आंसू की लड़ियां , अधरों पर मधु - लोरी - गान !
    धन्य तुम्हारा जीवन है मां ! तुम पर तन मन धन बलिदान !
    तुम पर जग न्यौछावर माता ! स्वत्व मेरा तुम पर बलिदान!!


    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  33. हाँ ...मां ऐसी ही तो होती है ...
    माँ को देखते थे तो सोचते थे माँ ऐसी क्यूँ हैं ...जब खुद माँ बने तो जाना माँ सब ऐसी ही होती हैं ...!

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  34. सच है माँ ऐसी ही होती है . माँ तुझे प्रणाम . अति सुन्दर अभिव्यक्ति .

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  35. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...

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  36. इस बार तो फुल टाइम माँ के नज़रिए से कविता भी लिख दी आपने. वाह क्या बात है.
    चर्चा मंच पे देख के अच्छा लगा.

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  37. माँ-जो ममतामयी है,माता -जो निर्माता है, उसका सही गुणगान करके आपने सब को उसका ख्याल रखने को प्रेरित किया है ;इसी प्रकार भारत -माता का भी सब ख्याल करें

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  38. पिछले कुछ महीने काम से सम्बंधित परेशानियों और अन्य परेशानियों से गुजर रहे है...
    ऐसे में आजकल मुझे तब बहुत अच्छा लगता है जब माँ फोन कर के बहोत कुछ समझाती है...उस वक्त मेरी सारी चिंताएं दूर हो जाती है...

    बहुत बहुत अच्छी कविता...एक एक लाइन सही है...:)

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  39. बिल्‍कुल यही सच है मोनिका जी।

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  40. बहुत ही प्यारी भावनाएं है आपकी
    आपको बधाई देता हूं

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  41. मोनिका जी,
    "माँ जीती कम जागती ज्यादा है "
    आपकी बस यह एक पंक्ति ही पूरी की पूरी कविता है !
    बहुत ही अच्छे भाव हैं !
    शुभकामनाएं !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  42. बहुत ही खूबसूरत रचना. बेह्तारें अंदाज़

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  43. माँ क्या है ये शायद सबसे ज्यादा वो महसूस करते होंगे जो माँ से दूर रहते हैं ...
    माँ शब्द ही सुन्दर है और उसपर लिखी रचना तो सुन्दर होना ही है ...
    Thank You!

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  44. मैं भी ये ही कहूँगी की माँ तो माँ होती है और बिलकुल ऐसी ही होती है ...

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  45. खुरदरे यथार्थ पर फिसलती एक सुंदर कविता।

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  46. माँ तो बस माँ है... तमाम अभिव्यक्तियों से ऊपर... स्वयं में शाश्वत अभिव्यक्ति... संवेदनशील रचना पर आभार.

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  47. wakai MAA aisi hi hoti hai..bhahut achi rachna...bhadhai.

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  48. "Maa" ke baare main aapne sunder tareeke se bataya. Bhaut achhi prastuti. Iske liye apko shubhkaamnayen...........

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  49. मोनिका जी,मां पर इस सुन्दर रचना के लिए बधाई!

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  50. माँ के हर रूप को आपकी लेखनी ने छू लिया है इस कविता में..

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  51. monika ji.. bahut sundar.. maa jataati kam nibhati jyada hai.. maa ko sundar saache roop ko pesh kiya.............halanki maa ki mahima ko likha nahi jaa sakta par aapne sundar rachna maa par banayi hai....badhai..

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  52. ये एक लफ्ज ही काफी है

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  53. वैसे तो ये एक लफ्ज ही काफी है, जिसकी व्याख्या की जरुरत नहीं पड़ती। अगर पड़े तो शब्द नहीं मिलते। मिलते हैं तो जल्दी पकड़ में नहीं आते। आपने जरुर ही बड़े ही धैर्य के साथ शब्दों को पकड़ा है और ये कविता लिखी है। या फिर प्रवाहमान नदी की तरह शब्द उतरते चले गए हों। बधाई एक शब्द को व्याख्या देने की इस कामयाब कोशिश के लिए।

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  54. माँएं प्रकृतिस्वरूपा है जिन्होंने हमें सिर्फ दिया ही है!

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  55. ऐसी रचनाएं पढ़ कर हम लिखते कम ... सोचते ज्यादा हैं :)

    टाइटल देख कर ही मन भावुक हो गया था

    बेहद... बेहद... बेहद ..सुन्दर रचना है ....

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  56. आपकी कविता पढ़कर मेरी आँखों के सामने मेरी माँ नहीं, मेरी सासू माँ दिखाई दी मुझे अपने सामने. जैसा आपने लिखा एकदम वैसी ही हैं वो. आज एक नए नज़रिए से देखा उन्हें मैंने तो वो मुझे मेरी माँ से भी बढ़कर लगीं. धन्यवाद् .

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  57. सच है माँ तो एक विशाल विस्तृत आकाश है .... जिसके आँचल में सब कुछ समा जाता है ...

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  58. कितनी ममतामई होती है माँ...दिल को छू लेने वाली कविता

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  59. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना! माँ के बारे में जितना भी कहा जाए कम है!

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  60. मोनिका जी,
    नमस्ते!
    घर से दूर हूँ, बहुत मजबूर हूँ.
    आपकी रचना पढ़के यही कहूँगा:
    आए लव माई मम्मी.
    आशीष
    ---
    नौकरी इज़ नौकरी!

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  61. पता नहीं कैसे आपने इतना सब कुछ सोच लिया.. बिल्कुल सही बात है..

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  62. अब समझा कि माँ ऐसी क्यों होती है.. नन्हें राजकुमार (चैतन्य) से मिल कर आ रहा हूँ.. :)

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  63. अब क्या कहूँ....

    ह्रदय से आभार आपका भावुक करने के लिए...

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  64. और माँ आपकी इस रचना के बारे में क्या कहती है ?
    कमाल की शैली में लिखा है, उसके बारें में जो खुद कमाल है ;)
    लिखते रहिये ....

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  65. दिल को छू लेने वालें भाव हैं। बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  66. सीमित और सरल शब्‍दों में अर्थपूर्ण और प्रभावी अभिव्‍यक्ति.

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  67. सच कहा आपने, मां ऐसी ही होती है।

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  68. Thaks for Exilent Poem ON " MAA"
    MAA BHAGWAN HOTI HAI,
    VO Khushnashib hain,Jinki Maa Hoti hai,
    Vo Badnashib hain Jinki Maa Roti hai.
    Maa Kewal Maa Hoti hai.
    S.Sharma

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  69. .!देखती कम नज़र उतारती ज़्यादा है....!

    माँ ...!
    जताती कम निभाती ज़्यादा है....!

    माँ ...! कहती कम समझती ज़्यादा है..
    क्या कहूं? शब्द नहीं हैं मेरे पास. बिल्कुल ऐसी ही होती है मां.

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  70. Man ke bare mein jitana bhi kaha jay kam hai.Duniya ke sabhi karjon se mukti mil sakati hai lekin man ke dudh ke karj se nahi- man to man hi hoti hai. Good Post.Plz. visit my new post.

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  71. बहुत सुंदर अहसाश माँ के मन के अथाह प्यार जिम्मेदारियों उसके जीने के अंदाज का सुंदर वर्णन किया आपने ..........
    खुबसूरत रचना .....

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  72. मोनिका जी बहुत दिनों बाद यहाँ आई हू पर ...आपकी कविता दिल को छु गयी ..सच में माँ तो ये ही होती है .... कल तक ये हम भी कहते थे आज तो यही जीते है !

    बहुत सुन्दर बधाई !

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  73. monika ji
    aapne itni -itni achhi kavita maa ke naam samrpit ki hai jiska ek ek shabd sach aur kewal sach hai.
    aaj aapki kavita ne maa ki yaad dila di jo is janvary solah ko hamaara saath chhid gain .
    aaj aapki kavita ne maa ki yaad dila kar rone par vivash kar ,aansu se aankhe bhat uthin.
    bahut hi marm ko chhoo gai aapki post.
    hardik badhai---
    poonam

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  74. I don't understand a word, but with 83 comments it must be great!!

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  75. didi it's looking like ye koi lesson hai... :)ladkiyon ke liye... maan haan bilkul aisi hi hoti hai

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  76. माँ बिलकुल ऐसी ही होती है शायद हर माँ। बहुत अच्छी लगी कविता। शुभकामनायें।

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  77. माँ बस माँ होती है .yahi to ek aisi chij hai jiski tulana ke kabil kuchh hai hi nahi..सार्थक पोस्ट ..शुभकामनायें

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  78. माँ तो ऐसी ही होती है...अद्भुत!!

    बहुत सुन्दर रचना...

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  79. माँ पर बहुत भाव पूर्ण रचना ... आभार .... आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा...

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  80. दिल को छू लेने वाली कविता!

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  81. बहुत सुन्दर..रचना

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  82. आप सबकी भावपूर्ण टिप्पणियों के लिए बहुत बहुत आभार ... हार्दिक धन्यवाद

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  83. बहुत सुंदर !
    सच ! मां जताती कम निभाती ज़्यादा है

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  84. माँएं ऐसी ही होती हैं.... बहुत खूब चित्रण ....

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  85. maa ho to aap jaisi..sach..kasam se..

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  86. बहुत अच्छा लिखती हैं आप. ब्लॉग भी बहुत सुंदर है. माँ कविता बहुत मार्मिक है. सुंदर लेखन और उस पर १०० वीं टिप्पणी के लिए हार्दिक बधाई.

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  87. monika ji bahut aacha likha aapne

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  88. maa ! sabki to aisi hi hoti hai naa...bahot khubsurat rachna hai ...dil ke bahot kareeb...ek aur baat kahni hai...aapki profile photo dekhi...aap bahot pyari hain...mere blog par aa kar mera hausla badhane ka shukruyaa,

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  89. This is really good one. Simply fantastic. MAA --is shabd me kitna apnatv hai sach much!!!!

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